तमिलनाडु सरकार ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) को खत्म करके इसकी जगह उच्च शिक्षा आयोग गठित करने के केंद्र के प्रस्ताव का विरोध किया है. तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के पलानिस्वामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर केंद्र सरकार के इस फैसले पर आपत्ति जताई है. इस पत्र में पलानिस्वामी ने कहा है, ‘विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की मौजूदा व्यवस्था नियामक और वित्तीय अनुदान मुहैया कराने वाली संस्था के लिहाज से ठीक से काम कर रही है.’

27 जून को मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एचआरडी) ने एक नए कानून का मसौदा जारी करके यूजीसी अधिनियम, 1956 को खत्म किए जाने की जानकारी दी थी. सरकार की दलील है कि वह इस कदम से विश्वविद्यालयों पर से ‘निरीक्षण राज’ खत्म करना चाहती है. इस मसौदे के मुताबिक उच्च शिक्षा आयोग केवल अकादेमिक मामलों पर ध्यान देगा और अनुदान देने का काम मानव संसाधन विकास मंत्रालय के जिम्मे होगा.

पलानिसामी ने अपने पत्र में यह दलील भी दी है कि यूजीसी पारदर्शी तरीके से अनुदान का आवंटन करता है. तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के मुताबिक यूजीसी को मिली वित्तीय शक्तियां सुनिश्चित करती हैं कि उसकी सिफारिशें लागू की जाएं. पलानिस्वामी ने इस पत्र में लिखा है, ‘अगर वित्तीय शक्तियां मंत्रालय के पास चली जाती हैं तो हमें लगता है कि इससे 100 प्रतिशत अनुदान का पैटर्न बदल जाएगा. फिर यह केंद्र सरकार और राज्य सरकार के बीच 60 : 40 के अनुपात में हो जाएगा.’

द हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री केपी अंबालागन समेत अन्य सरकारी अधिकारियों ने शुक्रवार को एक बैठक की थी और इसमें फैसला लिया गया था कि तमिलनाडु सरकार केंद्र के उच्च शिक्षा आयोग अधिनियम, 2018 के मसौदे का विरोध करेगी.