इस स्तंभ का पिछला आलेख पढ़ते हुए जाहिर है कि आप ऑस्टियोपोरोसिस के बारे में चिंतित हो चुके होंगे. इसके साथ दो सबसे सहज सवाल भी यहां उठते हैं. पहला सवाल है कि कहीं आपकी हड्डियां भी तो इसी तरह कमजोर नहीं हो चुकी हैं? इसी में यह सवाल भी शामिल है कि क्या हड्डी टूटने के पहले ही बताया जा सकता है कि हड्डी कमजोर थी? या क्या पहले कोई जांच करके इसका पता नहीं चल सकता? चलिए इन सवालों के उत्तर मूल सवाल-जवाब के फॉर्मेट में ही समझते हैं.

सवाल – क्या मुझे भी ऑस्टियोपोरोसिस की आशंका है?

आजकल हाथ-पांव, जोड़ या कमर दर्ज होते ही कई डॉक्टर मन में संदेह डाल देते हैं कि शरीर में कैल्शियम की कमी हो रही है और आपको ऑस्टियोपोरोसिस हो सकता है. वे बोन डेंसिटी टेस्ट आदि भी कराने को कह देते हैं. लेकिन याद रहे, आपको ऑस्टियोपोरोसिस होने का खतरा केवल निम्न परिस्थितियों में ही होता है :

· यदि आप महिला हैं और आपकी रजोनिवृत्ति हो चुकी है या आपकी उम्र उसके एकदम आसपास है, मतलब कि पचास के ऊपर.

· यदि आप किसी अन्य कारण से बहुत दिनों से बिस्तर से लगे हुए हैं. पिछले आलेख में हमने बताया था कि ऑस्टियोपोरोसिस पचास वर्ष के बाद, बढ़ती उम्र के साथ होने का डर रहता है. यदि किसी युवा व्यक्ति को लकवे या किसी अन्य कारण से बिस्तर पर लंबे समय के लिए पड़े रहना पड़ जाए तो उसकी हड्डियां भी कमजोर हो सकती हैं. यदि आप बहुत कम चलते-फिरते हैं, अक्सर लौंदे की तरह पड़े रहते हैं और व्यायाम आदि से सख्त नफरत करते हैं तब भी आपको यह रोग कम उम्र में ही पकड़ सकता है. कृपया इसकी जांच करा लें.

· यदि आप गठिया, थायरॉयड, खून की कमी आदि किसी भी लंबी बीमारी से पीड़ित हैं तब भी आपको यह बीमारी हो सकती है.

· यदि आप दो-तीन महीने से स्टेरॉयड्स ले रहे हैं तो आपको ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा है. यह तब होता है जब थायरॉयड का मरीज बिना जांच कराए, लंबे समय तक थायरॉयड हार्मोंस लेता जाता है. इसी प्रकार मिर्गी की दवाइयां, लीथियम नामक दवा (मानसिक रोगियों को दी जाती है) तथा इम्यूनोसप्रेशन करने वाली दवाइयां (जो गठिया में खूब लिखी जाती हैं) भी हड्डियों को कमजोर करती हैं. इनमें से कोई भी दवा ले रहे हैं तो हड्डियों की जांच करा लें.

· यदि आप खूब सिगरेट पीते हैं तो आपकी हड्डी बनाने वाली कोशिकाएं कमजोर पड़ जाती हैं. सिगरेट के आदी हैं तो जांच करा लें. शायद जांच की रिपोर्ट देखकर सिगरेट छोड़ दें.

· शराब के आदि हैं, तब भी इसकी आशंका है.

· साठ साल से ऊपर के बुजुर्ग हैं तब भी अलग से जांच कराएं.

· अगर आपकी किसी एक्स-रे जांच में डॉक्टर यह कहे कि हड्डियां कमजोर लग रही हैं तो भी जरूर जांच कराएं.

दूसरा सवाल – हड्डी की मजबूती किन जांचों से पता चलती है?

इसकी सबसे महत्वपूर्ण जांच है, बोन डेंसिटी की जांच. इससे यह पता चलता है कि हड्डी कितनी ठोस है या हल्की. इसके तहत कमर की हड्डी, कूल्हे, एड़ी, कलाई या हाथ की उंगलियों की विशेष एक्स-रे द्वारा जांच होती है. इसे DXA (Dual Xray Absorptiometry) कहते हैं. इसमें दो एक्स-रे ट्यूबों के बीच हड्डी को रखकर जांच की जाती है.

इसके तहत हड्डी का जो भी ठोसपन रिकॉर्ड होता है उसकी मानक या स्टैंडर्ड आंकड़ों से तुलना की जाती है. इसे टी स्कोर कहते हैं. यदि आपका टी स्कोर 2.5 से ऊपर है तो खुश रहें. यानी आपको फिलहाल हड्डी कमजोर होने जैसी कोई समस्या नहीं है.

बोन डेंसिटी मापने की और भी तकनीक हैं. इनमें से एक और है - SXA (Single Xray). इसके अलावा आजकल सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड की जांच द्वारा भी निर्णय लिया जा सकता है कि हड्डी कमजोर या नहीं. हालांकि अभी-भी सबसे लोकप्रिय और सटीक जांच DXA ही है.

क्या खून में विटामिन-डी और कैल्शियम की जांच से भी हड्डी की मजबूती का अंदाजा होता है? हां, होता है, लेकिन ये जांचें DXA के बाद ही उपयोगी हैं.

यहां गोल्ड स्टैंडर्ड जांच DXA ही है जो केवल उनको करानी चाहिए जिन लोगों का जिक्र हमने इस आलेख की शुरुआत में किया है. इसे यूं ही नहीं कराना चाहिए क्योंकि इसमें एक्स-रे का रेडिएशन होता है जो नुकसानदायक है.

तीसरा सवाल – ऑस्टियोपोरोसिस से कैसे बचें और इसका इलाज क्या है?

यह सवाल ऐसा है कि क्या मैं बुढ़ापे से बच सकता हूं? उम्र बढ़ेगा तो यह आएगा ही. हां, इसे विलंबित जरूर किया जा सकता है. इसके खतरे कम किए जाए सकते हैं. इसके लिए आपके जानने लायक बातें ये हैं :

· बच्चों को व्यायाम की आदत डालें. बचपन हड्डियां मजबूत होने का दौरा होता है जो जीवनभर काम देता है.

· व्यायाम, खासतौर पर चलना, जॉगिंग आदि जितना करेंगे और जितनी उम्र तक करते रहेंगे, हड्डियों को ताकत मिलेगी. आलस्य हड्डियों का दुश्मन है.

· दूध-दही और पनीर खाया करें. इनमें कैल्शियम होता है. हमें रोजाना 1000 मिलीग्राम तक कैल्शियम की जरूरत होती है. गोलिया खाएं तो 500 मिलीग्राम से ज्यादा की न खाएं. दो बार खाकर 1000 मिलीग्राम की मात्रा पूरी कर सकते हैं.

· रोज पंद्रह मिनट से पच्चीस मिनट धूप में गुजारें. शरीर का प्राकृतिक विटामिन डी चमड़ी के नीचे, धूप की गर्मी और अल्ट्रावॉयलेट किरणों से बनता है. विटामिन-डी की मात्रा 800-1000 यूनिट रोजाना तक होती है. हालांकि आजकल कैल्शियम की गोलियों में विटामिन-डी की इतनी मात्रा मिली होती है.

· सोयाबीन खाने में शामिल करें. इसमें ईस्ट्रोजन जैसा प्रभाव होता है.

· खाने में प्रोटीन और विटामिन उचित मात्रा में लें. डायटिंग न करें. कुपोषण भी हड्डियां कमजोर होने का एक प्रमुख कारण है.

· उम्र बढ़े तो बेंत या ट्राईपोडनुमा लाठी लेकर घूमा करें. इससे उचित बैलेंस बनता है और गिरने से बचते हैं.

· कोई भी दवाई, बिना डॉक्टरी सलाह के न लें. कई दवाइयां हड्डियों को कमजोर करती हैं.