भाजपा ने भारत-म्यांमार सीमा का गलत निर्धारण किए जाने का दावा किया है. पार्टी की मणिपुर इकाई के प्रवक्ता ओ जॉय ने शनिवार को कहा कि दोनों देशों की सीमा के निर्धारण के लिए बनाए गए ‘संयुक्त आयोग’ ने एक खंभे (पिलर) को गलत स्थान पर लगाया था. जॉय का कहना है कि ऐसा करके 1967 में हुए यंगून समझौते का उल्लघन किया गया था. इंफाल के एक समाचार पत्र के मुताबिक जॉय ने दावा किया है कि यंगून समझौते के अनुसार पिलर नंबर-81 को मांजेट लोक नदी के दाहिने किनारे पर म्यांमार की ओर होना चाहिए था लेकिन, आयोग ने इस पिलर को नदी की बायीं ओर भारतीय किनारे पर लगवा दिया.

जॉय ने सवाल किया है कि 1967 में सीमा निर्धारण के दौरान ‘संयुक्त आयोग’ द्वारा अक्षांश का उपयोग क्यों नहीं किया गया था. इसके पीछे आयोग का छुपा एजेंडा क्या था.

खबरों के मुताबिक जॉय पिछले दिनों इस मामले को लेकर मणिपुर के राज्यपाल चूरा चंद सिंह से भी मिले थे. बताया जाता है कि राज्यपाल ने उन्हें यह मामला विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के सामने उठाने का आश्वासन दिया है. हालांकि, विदेश मंत्रालय बीती 8 जुलाई को भारत-म्यांमार सीमा के गलत निर्धारण के इन दावों को आधारहीन और बेतुका बता चुका है.

इस मामले में गौर करने वाली यह भी है कि मणिपुर के तेंग्नौपाल जिले के जिला अधिकारी अबुजाम तोबिकांता विदेश मंत्रालय से अलग राय रखते हैं. उनका कहना है कि तेंग्नौपाल में स्थापित पिलर नंबर-81 ने राज्य में भ्रम पैदा कर दिया है. अबुजाम भी मानते हैं कि यह पिलर कम से कम तीन किलोमीटर भारतीय सीमा के अंदर लगाया गया है. अबुजाम ने पिछले महीने सीमा का निरक्षण करने के बाद ये बात कही थी.