शिवसेना यूं ताे बीते लंबे समय से अपनी सहयोगी भारतीय जनता पार्टी पर हमले का कोई मौका नहीं छोड़ रही है लेकिन इस बार उसने अपनी इस परंपरा से उलट काम किया है. उसने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के ख़िलाफ़ समर्थन मांगने गए टीडीपी (तेलुगु देशम पार्टी) सांसदों को बैरंग लौटा दिया है. टीडीपी संसद के मानसून सत्र में मोदी सरकार के ख़िलाफ़ फिर अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी में है. इसीलिए वह विभिन्न विपक्षी दलों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है.

द एशियन एज़ के मुताबिक टीडीपी अध्यक्ष और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के कहने पर पार्टी के दो सांसद- टी नरसिम्हन और पी रवींद्र बाबू रविवार को शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे से मिलने मुंबई गए थे. उन्होंने इस बाबत ठाकरे से मुलाकात का वक़्त भी मांगा. पर ठाकरे ने उन्हें वक़्त नहीं दिया. ठाकरे के जनसंपर्क अधिकारी (पीआरओ) ने इसकी पुष्टि की है कि शिवसेना प्रमुख ने टीडीपी सांसदों से मुलाकात नहीं की है. हालांकि उनके इस रुख़ का कोई कारण अब तक सामने नहीं आया है.

वैसे शिवसेना का यह रुख़ इन तथ्यों के मद्देनज़र दिलचस्प है कि केंद्र और राज्य में भाजपा के साथ सरकार में शामिल होने के बावज़ूद दोनों दलों के संबंध अच्छे नहीं हैं. शिवसेना महाराष्ट्र में लोक सभा और विधानसभा का चुनाव अकेले लड़ने का ऐलान कर चुकी है. हालांकि अब तक उसने भाजपा की अगुवाई वाला एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) छोड़ा नहीं है. अलबत्ता टीडीपी ज़रूर केंद्र द्वारा आंध्र को विशेष राज्य का दर्ज़ा न दिए जाने की वज़ह से एनडीए छोड़ चुकी है. और अब वह इस पर विपक्षी दलों का समर्थन जुटा रही है.