आखिरकार अब भारत में निजता के अधिकार को जरूरी तवज्जो मिलती दिखने लगी है. पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा था कि निजता का अधिकार नागरिकों का मूलभूत अधिकार है. वहीं सोमवार को टेलिकॉम क्षेत्र के नियामक ट्राई ने इस सिलसिले में स्पष्ट किया है कि उपभोक्ता अपने से जुड़े डेटा के मालिक हैं. केंद्र सरकार इस समय निजता से जुड़ी व्यवस्था की रूपरेखा तैयार करने में जुटी है और इसी सिलसिले में ट्राई ने अपनी तरफ से यह सिफारिश उसे भेजी है.

इस सिफारिश के साथ ट्राई ने कहा है कि टेलिकॉम कंपनियां, इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर, मोबाइल बनाने वाली कंपनियां और संचार तकनीक से जुड़ी अन्य कंपनियां जो उपभोक्ताओं से जानकारियां हासिल करती हैं, वे इस डेटा की संरक्षक भर हैं. इन कंपनियों का इन जानकारियों या डेटा पर पहला अधिकार नहीं है.

हालांकि यह अलग से कहने की जरूरत नहीं होनी चाहिए कि चाहे कोई भी डिवाइस हो या सर्विस प्रोवाइडर हो, हर उपभोक्ता का खुद से जुड़ी जानकारियों-सूचनाओं पर कॉपीराइट है. इस तरह उपभोक्ताओं के पास अपनी जानकारियों को साझा करने की सहमति, उनके चुनाव और उन्हें नष्ट करने का अधिकार भी है. लेकिन इन अधिकारों को सुरक्षित रखने के लिए सबसे पहली जरूरत है कि भारत में डेटा सुरक्षा से जुड़ा कानून लागू हो. इसके साथ ही एक स्वतंत्र नियामक बने जो उपभोक्ताओं के डेटा के इस्तेमाल पर नजर रख सके और डेटा इकट्ठा करने वाली कंपनियों की जवाबदेही सुनिश्चित करे.

इस समय जस्टिस श्रीकृष्ण समिति डेटा सुरक्षा के मसले पर एक व्यवस्था की रूपरेखा तैयार कर रही है. जल्दी ही इसे अंतिम रूप दिया जाना है ताकि इस आधार पर फिर कानूनी ढांचा तैयार हो सके. यूरोप में अगर कोई कंपनी उपभोक्ताओं की अनुमति के बिना उनसे जुड़ी जानकारी का इस्तेमाल करती है तो उस पर भारी-भरकम जुर्माने का प्रावधान है. यह जुर्माना इतना ज्यादा हो सकता है कि इससे कंपनी ही बंद हो जाए और जाहिर है कि यह प्रावधान कंपनियों में कानून का डर पैदा करने के लिए बनाया गया है. भारत में भी यूरोप की तर्ज पर ही डेटा सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्था कायम होनी चाहिए.

लेकिन जैसा कि कहा जाता है, कानून उतने ही मजबूत होते हैं, जितनी कि उन्हें लागू करवाने वाली व्यवस्था. भारत में एक दशक पहले टेलिमार्केटिंग कंपनियों के कॉल्स रोकने के लिए ट्राई ने ‘डू नॉट कॉल’ रजिस्ट्री की व्यवस्था शुरू की थी, लेकिन यह पूरी तरह नाकाम साबित हुई. इसलिए जरूरी है कि डेटा सुरक्षा से जुड़े कानून के साथ व्यापक पैमाने पर वह तकनीकी क्षमता भी विकसित की जाए जिससे इस कानून का पालन सुनिश्चित हो और उपभोक्ताओं के हित सुरक्षित रहें. (स्रोत)