भारतीय जनता पार्टी हमेशा से ही असम में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी मुस्लिमों को मुद्दा बनाती रही है. उन्हें वापस उनके देश भेजने की मांग भी करती रही है. लेकिन अब सूत्रों की मानें तो इन्हीं लोगों को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार लंबी अवधि का वर्क परमिट जारी करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार के इस कदम के राजनीतिक निहितार्थ भी निकाले जा रहे हैं.

द एशियन एज़ के मुताबिक केंद्रीय गृह मंत्रालय उन सभी को लंबी अवधि का वर्क परमिट जारी करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है जिन्हें असम के विदेशी नागरिक न्यायाधिकरण (फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल) ‘विदेशी’ घोषित कर दिया है. हालांकि ऐसे लोगों में बांग्लादेशी मुस्लिमों की तादाद ही ज़्यादा है. मंत्रालय में शीर्ष स्तर पर यह धारणा बन रही है कि इन लोगों को बांग्लादेश भेजने की प्रक्रिया काफी धीमी और काफी समय लेने वाली है. इन्हें अंतरराष्ट्रीय सीमा से सीधे बांग्लादेश वापस खदेड़ देना भी संभव नहीं है. लिहाज़ा यह बीच का रास्ता निकाला गया है.

सूत्र बताते हैं कि विदेशी नागरिक न्यायाधिकरण ने असम में रह रहे जिन लोगों को ‘बांग्लादेशी’ घोषित कर दिया है उन्हें भारत में कोई सियासी हक़ नहीं होगा. यानी वे न चुनाव लड़ सकेंगे और न ही वाेट दे सकेंगे. ये लोग भारत में कोई अचल संपत्ति (मकान, दुकान, ज़मीन आदि) भी नहीं ख़रीद सकेंगे. इसीलिए इनकी सुविधा के लिए इन्हें लंबी अवधि का वर्क परमिट जारी करने पर विचार किया जा रहा है. ताकि जब तक वे भारत में रहें अपनी गुजर-बसर करने के लिए कुछ काम कर सकें.

सूत्रों के मुताबिक गृह मंत्रालय इन नागरिकों के लिए लंबी अवधि का वर्क परमिट जारी करने से जुड़े तमाम पहलुओं का अध्ययन कर रहा है. इसके फ़ायदे-नुक़सान का आकलन कर रहा है. जल्द ही इस बाबत कोई फैसला हो सकता है. ग़ौरतलब है कि असम में क़रीब 20,000 लोगों को विदेशी नागरिक न्यायाधिकरण ने ‘बांग्लादेशी’ घोषित किया है. इन सभी काे फिलहाल अलग-अलग जगहों पर सरकार की निगरानी में रखा जा रहा है.