हरियाणा के रेवाड़ी जिले में स्थित एक माध्यमिक सरकारी स्कूल में पढ़ने वाली कुसुम कुमारी सातवीं कक्षा की छात्रा है. उसे इस स्कूल में सब कुछ अच्छा लगता है. बस दोस्तों की कमी खलती है. इस स्कूल में उसका कोई दोस्त नहीं. आखिर हो भी तो कैसे? द टाइम्स आॅफ इंडिया की एक खबर के मुताबिक वह इस स्कूल में पढ़ने वाली इकलौती छात्रा जो है. कुसुम इस स्कूल में अकेले ही पढ़ने आती है और इस स्कूल में तैनात दया किशन नाम के इकलौते शिक्षक उसे हर विषय की पढ़ाई कराते हैं.

अखबार के मुताबिक शैक्षिक सत्र 2014-15 के दौरान रेवाड़ी के इस सरकारी स्कूल में 12 छात्राएं पढ़ने आती थीं. साल 2016 में यह संख्या बढ़कर 22 पर पहुंची थी. पर मौजूदा समय में यहां सिर्फ एक छात्रा ही पढ़ रही है. दया किशन बताते हैं, ‘राज्य शिक्षा विभाग इस स्कूल पर प्रति वर्ष साढ़े आठ लाख रुपये का खर्च करता है लेकिन यहां पढ़ने के लिए आने वाली छात्राओं की संख्या बढ़ने का नाम नहीं ले रही.’ दया किशन आगे कहते हैं, ‘मेरा ऐसा मानना है कि इस छात्रा को पढ़ने के लिए नजदीक के किसी अन्य स्कूल में भेज दिया जाना चाहिए.’

सवाल उठता है कि सिर्फ एक छात्रा के साथ तीन कमरों वाले इस स्कूल को क्यों चलाया जा रहा है. इस पर रेवाड़ी जिला के शिक्षा अधिकारी सुरेश गोरिया का कहना है, ‘लुखी गांव में स्थित इस स्कूल की स्थिति से शिक्षा वि​भाग अच्छी तरह वाकिफ है. इस स्कूल में फिलहाल एक छात्रा पढ़ रही है. ऐसे में विभाग उसे इस स्कूल में प्रवेश देने और पढ़ाने से मना नहीं कर सकता. अगर यह छात्रा खुद किसी दूसरे स्कूल में जाकर पढ़ाई की इच्छा जताती है तो उस स्थिति में स्कूल को लेकर कोई फैसला किए जाने पर विचार किया जाएगा.’