केंद्र सरकार के खिलाफ विपक्षी दलों की तरफ से लाए गए ​अविश्वास प्रस्ताव पर इसी शुक्रवार को चर्चा कराए जाने के बाद मत विभाजन होगा. लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने इसके लिए मंजूरी दे दी है. अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए सात घंटे का समय तय किया गया है. खबरों के मुताबिक इस दिन प्रश्नकाल और गैर सरकारी कामकाज स्थगित रखा जाएगा और सिर्फ अविश्वास प्रस्ताव पर ही चर्चा होगी.

इस मसले पर कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा है कि विपक्षी दलों ने सरकार को घेरने की पूरी तैयारी की है और ‘नंबर गेम’ के लिहाज से विपक्ष काफी मजबूत है. उधर, केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले का कहना है कि अविश्वास प्रस्ताव को लेकर विपक्ष चाहे जितना आत्मविश्वास से भरा हो, लेकिन 20 जुलाई को सरकार स्पष्ट बहुमत साबित करने में सफल रहेगी. वहीं केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है, ‘अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के कार्यकाल में भी कांग्रेस ने अविश्वास प्रस्ताव के रूप में अहंकार दिखाया था और उस वक्त भी उसे मुंह की खानी पड़ी थी. इस बार भी कुछ ऐसा ही होगा.’

इस बीच तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेता दिनेश त्रिवेदी ने इस प्रस्ताव पर 20 जुलाई के बजाय 23 जुलाई को चर्चा व मतदान कराए जाने की मांग की थी. उनका कहना था पश्चिम बंगाल में 21 जुलाई को शहीदी दिवस मनाया जाता है ऐसे में टीएमसी के सांसद सदन में मौजूद नहीं रहेंगे. हालांकि बाद में पार्टी ने व्हिप जारी करके अपने सांसदों को इस प्रस्ताव के दौरान सदन में मौजूद रहने को कह दिया है.

अगर आंकड़ों के लिहाज से देखें तो 535 सदस्यों वाली लोकसभा में भाजपा और इसके सहयोगी दलों के सदस्यों की कुल संख्या 311 है. भाजपा के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार को बहुमत के लिए 272 सांसदों के समर्थन की आवश्यकता है. ऐसे में ‘नंबर गेम’ के लिहाज से इस अविश्वास प्रस्ताव में भाजपा व इसके सहयोगी दलों का पलड़ा भारी लगता है.