आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू महामुख्यमंत्री-17 की सूची में दूसरे स्थान पर थे. इस बार वे इस सूची में एक पायदान नीचे खिसककर तीसरे स्थान पर पहुंच गए हैं. इस दौरान चंद्रबाबू नायडू ने भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबसे मजबूत सहयोगी होने से लेकर उनके विरोधी होने तक का सफर तय कर लिया है.

जब 2014 में नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने थे तो उनके साथ ही मुख्यमंत्री के तौर पर चंद्रबाबू नायडू की भी आंध्र प्रदेश में वापसी हुई थी. इससे पहले उन्होंने सत्ता से दस साल का वनवास झेला था. हालांकि 2014 में भाजपा को अपने बूते ही बहुमत हासिल हो गया था लेकिन फिर भी चंद्रबाबू नायडू की पहचान उनके सबसे मजबूत सहयोगी की बन गई. बाद में यही पहचान उनकी सबसे बड़ी दिक्कत भी बन गई. आंध्र प्रदेश की जीत में चंद्रबाबू नायडू की विशेष राज्य के दर्जे की मांग की भी बड़ी भूमिका थी. उनके भाजपा और नरेंद्र मोदी के करीब दिखने से प्रदेश के लोगों में यह संदेश गया कि आंध्र प्रदेश विशेष राज्य का दर्जा भले ही हासिल न कर पाएं लेकिन विशेष पैकेज आसानी से हासिल कर लेगा.

लेकिन हालत यह हो गई कि भाजपा से गठबंधन तोड़ने से पहले चंद्रबाबू नायडू को यह तक कहना पड़ा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने के लिए वे लगातार समय मांग रहे हैं जो उन्हें नहीं दिया जा रहा है. इस पृष्ठभूमि में उनकी और नरेंद्र मोदी की राह अलग हो गई. अब वे गैर कांग्रेसी विपक्ष के एक प्रमुख चेहरे के तौर पर दिख रहे हैं. लेकिन बार-बार भाजपा के पास आने-जाने से विपक्ष में उनकी वह साख नहीं है जो ममता बनर्जी की है.

इसके बावजूद अगर चंद्रबाबू नायडू अभी भी तीसरे नंबर पर हैं तो उसकी कई वजहें हैं. इस कार्यकाल में वे पिछली बार वाली गलतियां नहीं कर रहे हैं. इस बार शहरों और काॅरपोरेट क्षेत्र के साथ-साथ उनकी सरकार किसानों और गांवों के लिए भी काम करती हुई दिख रही है. कुल मिलाकर देखा जाए तो चंद्रबाबू नायडू इस बार के कार्यकाल में शहरों और गांवों के बीच एक समन्वय बनाते हुए दिख रहे हैं.

वे अमरावती को आंध्र प्रदेश की नई राजधानी के तौर पर विकसित कर रहे हैं. जिन लोगों ने भी वहां के काम को जमीनी स्तर पर देखा है या जो लोग इस परियोजना की रूपरेखा को थोड़ी बारीकी से जानते हैं, उनका कहना है कि जब अमरावती पूरी तरह से तैयार होगा तो संभवतः यह भारत का सबसे सुनियोजित शहर होगा. नायडू के इस कार्यकाल में श्रीसिटी एक प्रमुख औद्योगिक हब बनकर उभरा है. यहां मोबाइल बनाने वाली कई कंपनियों ने अपनी इकाइयां लगाई हैं.

किसानों की खुशहाली के लिए चंद्रबाबू नायडू ने अब तक के कार्यकाल में जो एक बड़ा काम किया है वह है गोदावरी नदी को कृष्णा नदी से जोड़ने का. दोनों नदियों को जोड़ने वाली इस पट्टिसेमा परियोजना की शुरुआत 29 मार्च, 2015 को हुई थी. 174 किलोमीटर की इस परियोजना को साल भर के अंदर पूरा कर लिया गया. इससे रायलसीमा क्षेत्र की उस सात लाख हेक्टेयर जमीन को सिंचाई की सुविधा मिल पा रही है जहां पहले ऐसा कर पाना बड़ा मुश्किल था. चंद्रबाबू नायडू के पिछले कार्यकाल की सबसे बड़ी आलोचना ही यही थी कि उन्होंने किसानों की अनदेखी की है.

इन वजहों से चंद्रबाबू नायडू विकास और गवर्नेंस के मोर्चे पर अगली कतार में खड़े दिखते हैं. गठबंधन राजनीति में स्वीकार्यता और प्रदेश के बाहर पहचान के मामले में भी वे मजबूत दिखते हैं. चंद्रबाबू नायडू इस दौर के उन मुख्यमंत्रियों में से हैं जिनके बारे में कहा जा सकता है कि वे कभी भी राष्ट्रीय राजनीति में अहम भूमिका में आ सकते हैं. मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर वे इस तरह का संकेत भी दे चुके है.


महामुख्यमंत्री-2018 : देश के सबसे ताकतवर और प्रभावी 10 मुख्यमंत्री

#1 कमजोर मुख्यमंत्रियों वाले इस दौर में ममता बनर्जी अपवाद हैं

#2 नीतीश कुमार अभी भले कमजोर हैं लेकिन भविष्य में क्या होगा, कहा नहीं जा सकता

#3 विकास और गवर्नेंस के पैमाने पर चंद्रबाबू नायडू अभी भी बाकी मुख्यमंत्रियों से मीलों आगे हैं

#4 उपचुनावों में हार के बाद योगी आदित्यनाथ कमजोर होने के बजाय मजबूत हो गये हैं

#5 नवीन पटनायक और उनकी पार्टी की प्रकृति गठबंधन राजनीति से पूरी तरह मेल खाती है

#6-10 इनमें से दो मुख्यमंत्रियों के नाम शीर्ष पांच में भी हो सकते थे

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