पाकिस्तान के चुनाव में इस बार क्रिकेटर से नेता बने इमरान खान की पार्टी- पीटीआई (पाकिस्तान तहरीक़-ए-इंसाफ़) पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ की पीएमएल-एन (पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज़) को तगड़ी चुनौती दे रही है. बल्कि ख़बरों में कहा तो यह भी जा रहा है कि पीटीआई इस बार नेशनल असेंबली में सबसे बड़े दल के रूप में उभर सकती है.

समाचार एजेंसी पीटीआई ने पाकिस्तान के राजनीतिक विश्लेषकों के हवाले से बताया है कि मुल्क लौटकर नवाज़ शरीफ के जेल जाने के फैसले के बाद माहौल तेजी से बदला है. उनकी पार्टी के पक्ष में सुहानुभूति बढ़ रही है. इसके दम पर पीएमएल-एन अब पीटीआई के साथ कुछ मुकाबले में दिख रही है. अलबत्ता पीटीआई की बढ़त अब भी बनी हुई है. पाकिस्तान में नेशनल असेंबली के साथ चार प्रांतीय असेंबलियों के लिए 25 जुलाई को वोट डाले जाने हैं.

विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव में ख़ैबर पख़्तूनख्वा में पीटीआई की सीटें बढ़ सकती हैं, जहां वह अब तक सत्ता में थी. पंजाब प्रांत के दक्षिणी हिस्से से भी उसे अच्छी संख्या में सीटें मिल सकती हैं. लेकिन सत्ता तक पहुंचने के लिए उसे पूरे पंजाब प्रांत में सबसे ज़्यादा सीटें हासिल करनी होंगी. पंजाब में नेशनल असेंबली की सबसे ज़्यादा 95 सीटें हैं. जो पार्टी यहां सबसे ज़्यादा सीटें जीतती है उसी के बारे में माना जाता है कि वह देश में सरकार बनाती है.

दिलचस्प बात ये है कि पंजाब में पीएमएल-एन का प्रभाव सबसे ज़्यादा है. सरकार भी इसी पार्टी की रही है. नवाज़ के भाई शाहबाज़ शरीफ यहां मुख्यमंत्री रहे हैं. पीएमएल-एन इस बार शाहबाज़ की ही अगुवाई में चुनाव लड़ रही है. उनके साथ अब नवाज़ के लिए उभरी सुहानुभूति भी है जो अब पीटीआई के लिए चुनौती बन गई है. वैसे आंकडों के मुताबिक नेशनल असेंबली की 272 सीटों के लिए 3,459 उम्मीदवार मैदान में हैं. जबकि चार प्रांतों की 577 सीटों के लिए 8,396 प्रत्याशी हैं.

पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्‌टो और उनके पति पूर्व राष्ट्रपति आसिफ अली ज़रदारी की पार्टी- पीपीपी (पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी) का असर सिंध में सबसे ज़्यादा है. यह पार्टी इस बार बेनज़ीर के पुत्र बिलावल भुट्‌टो ज़रदारी की अगुवाई में चुनाव मैदान में है. लेकिन इसके बारे में कहा जा रहा है कि नेशनल असेंबली में यह तीसरे स्थान पर रह सकती है.