देश की जेलों में सजा काट रहे कई लोगों और उनके परिवारों के लिए अच्छी खबर है. सरकार ने ऐसे कैदियों को रिहा करने का फैसला किया है जिन्हें गैर-जघन्य अपराधों के लिए सजा सुनाई गई है और जो इस सजा की कम से कम आधी अवधि पूरी कर चुके हैं. बुधवार को कैबिनेट की बैठक में यह फैसला लिया गया. टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक सरकार तीन चरणों में कैदियों को रिहा करेगी. जिन्हें जेल से मुक्त किया जाएगा उनमें बुजुर्ग नागरिक, महिलाएं, ट्रांसजेंडर, विकलांग और ऐसे कैदी शामिल हैं जिनकी किसी बीमारी के चलते मौत होने वाली है.

खबर के मुताबिक सरकार महात्मा गांधी की जयंती एक वर्ष तक मनाने की तैयारी में है. यही वजह है कि उसने रिहाई के तीनों चरणों के लिए वे दिन चुने हैं जिनका महात्मा गांधी से संबंध है. इस साल दो अक्टूबर को गांधी जयंती के दिन पहले बैच के कैदियों को मुक्त किया जाएगा. दूसरा बैच अगले साल 10 अप्रैल चंपारण सत्याग्रह की सालगिरह के दिन रिहा किया जाएगा. वहीं, आखिरी बैच दो अक्टूबर, 2019 को आजाद होगा.

कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने साफ किया है कि फांसी या उम्र कैद की सजा पाए कैदियों को यह विशेष राहत नहीं दी जाएगी. उन्होंने कहा कि दहेज, बलात्कार, मानव तस्करी जैसे जघन्य अपराधों के लिए सजा पाए लोगों को भी मुक्त नहीं किया जाएगा. इसके अलावा पोटा, यूएपीए, टाडा, एफआईसीएन, पॉक्सो, हवाला, फेमा, एनडीपीएस और भ्रष्टाचार निरोधी कानून के तहत सजायाफ्ता लोगों को भी राहत नहीं मिलेगी.

इस बारे में केंद्रीय गृह मंत्रालय जल्द ही सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को एडवाइजरी जारी कर कैदियों को मुक्त करने संबंधी प्रक्रिया आगे बढ़ाने को कहेगा. हरेक राज्य अपने यहां एक समिति गठित करेगा जो मुक्त किए जाने के योग्य कैदियों का चुनाव करेगी और इस संबंध में अपनी सिफारिशें राज्यपाल के सामने रखेगी.