संसद में मोदी सरकार के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव की चर्चा से पहले ही विपक्ष को झटका लगा है. उसके दो सांसद कम हो गए हैं. हालांकि इस संख्या बल से नतीज़े में कोई ज़्यादा असर पड़ने की संभावना नहीं है. फिर भी यह मायने रखता है क्योंकि इन दो में से एक सांसद तो टीडीपी (तेलुगु देशम पार्टी) से ही जुड़े हैं जिसने अविश्वास प्रस्ताव पेश किया है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक टीडीपी सांसद जेसी दिवाकर रेड्‌डी ने कहा है कि वे व्हिप के बावज़ूद शुक्रवार को लोक सभा में अविश्वास प्रस्ताव की चर्चा और फिर होने वाले मतदान में हिस्सा नहीं लेंगे. उनके मुताबिक वे पूरे मानसून सत्र के दौरान ही लोक सभा की कार्यवाही में शामिल नहीं होंगे. दिवाकर रेड्‌डी आंध्र प्रदेश की अनंतपुरामु लोक सभा सीट से चुने गए हैं.

उन्होंने कहा, ‘इस अविश्वास प्रस्ताव की कोई ज़्यादा अहमियत नहीं है. यह रस्म अदायगी जैसा है. सरकार को इससे कोई फर्क़ नहीं पड़ने वाला. फिर दूसरी बात मैं हिंदी या अंग्रेजी में बोल नहीं सकता. ऐसे में मेरे रहने या न रहने से कोई अंतर नहीं पड़ने वाला है.’ वैसे दिवाकर रेड्‌डी पार्टी से असंतुष्ट बताए जाते हैं. वे चुनावी राजनीति से संन्यास लेने की बात भी कह चुके हैं. उनके बारे में कहा जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व ने उन्हें अगली बार अनंतपुरामु से टिकट न देने का मन लिया है.

उधर एक अन्य घटनाक्रम में गुरुवार को लोक सभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने बीजेडी (बीजू जनता दल) सांसद बैजयंत जय पांडा का इस्तीफ़ा स्वीकार कर लिया है. पांडा ने 12 जून को इस्तीफ़ा दिया था. उन्होंने बुधवार को लोक सभा अध्यक्ष से मिलकर अपील की कि उनका इस्तीफ़ा मंज़ूर कर लिया जाए. पांडा को बीजेडी ने इसी जनवरी में पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाते हुए निलंबित कर दिया था. वे केंद्रपाड़ा लोक सभा क्षेत्र से चुने गए थे.

वैसे इन दो के अलावा केरल कांग्रेस (मणि) के सांसद जोस के मणि भी लोक सभा में मौज़ूद नहीं होंगे. उन्हें उनकी पार्टी राज्य सभा में भेज रही है. इसलिए वे लोक सभा छोड़ चुके हैं. इस तरह लोक सभा की प्रभावी सदस्य संख्या अब 533 हो गई है और बहुमत के लिए नरेंद्र मोदी सरकार को 266 सदस्यों के समर्थन की ज़रूरत होगी. जबकि भाजपा के पास फिलहाल अपने ही 273 सांसद हैं.

ग़ौरतलब है कि मोदी सरकार के चार साल के कार्यकाल में पहली बार शुक्रवार को उसके ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव लोक सभा में चर्चा होने जा रही है. वैसे 15 साल बाद लोक सभा में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा हो रही है.