पिछले साल सत्याग्रह की महामुख्यमंत्री वाली सूची में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नाम शीर्ष पांच में नहीं आ सका था. यह हैरानी की बात इसलिए थी कि क्योंकि न सिर्फ आबादी के बल्कि लोकसभा सीटों के मामले में भी उत्तर प्रदेश देश में सबसे आगे है.

योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके बारे में कहा जाता रहा है कि भारतीय जनता पार्टी की आंतरिक राजनीति में वे भविष्य के सितारे हो सकते हैं. दरअसल जिस तरह की राजनीति के जरिए योगी आदित्यनाथ ने अपनी पहचान बनाई है, उस पर भाजपा लगातार चलती रही है और निकट भविष्य में उसमें बदलाव के कोई आसार नजर नहीं आते. इसके बावजूद पिछले साल योगी आदित्यनाथ का शीर्ष पांच मुख्यंमंत्रियों में नहीं शामिल होना अचरज की बात थी. पिछले साल वे देश के शीर्ष 10 मुख्यमंत्रियों की सत्याग्रह की सूची में सातवें स्थान पर थे.

महामुख्यमंत्री-2018 की सूची में योगी आदित्यनाथ चौथे स्थान पर हैं. ऐसे में सवाल यह उठता है कि गोरखपुर उपचुनाव में भाजपा की हार के बावजूद राजनीतिक विश्लेषकों को वे मजबूत होते क्यों दिख रहे हैं?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भले अभी इस पर काफी अगर-मगर की स्थिति है लेकिन उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का गठबंधन हो जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. इसके साथ ही जैसा कि कैराना के उपचुनाव में देखा गया था, राष्ट्रीय लोक दल और कांग्रेस भी इनके साथ मिलकर प्रदेश में महागठबंधन जैसी स्थिति बना सकते हैं. अगर ऐसी स्थिति बनती है तो जिस उत्तर प्रदेश से भाजपा को 2014 में 80 में से 73 सीटें मिली थीं, वहां उसके लिए यह प्रदर्शन दोहरा पाना असंभव हो जाएगा.

यही समीकरण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूसरी पारी की राह का सबसे बड़ा रोड़ा कई राजनीतिक विश्लेषकों को लग रहा है. यही स्थिति नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी को पार्टी में सबको साथ लेकर चलने वाला रवैया अपनाने को बाध्य कर रही है. इन दोनों को मालूम है कि जिस तरह की विपक्षी गोलबंदी हो रही है, उसमें अगर पार्टी के अंदर भी नाराजगी बढ़ी तो इसका काफी नुकसान होगा. गोरखपुर उपचुनाव में योगी आदित्यनाथ की पसंद का उम्मीदवार नहीं उतारने का हश्र मोदी-शाह देख चुके हैं.

यह स्थिति भाजपा के अंदर योगी आदित्यनाथ को सबसे ताकतवर मुख्यमंत्री बना रही है. इससे पहले तक भाजपा के अंदर शिवराज सिंह चौहान सबसे ताकतवर मुख्यमंत्री हुआ करते थे. योगी के पास पूर्वांचल में अपना एक जनाधार है और उनकी एक खास तरह की ही सही लेकिन अपनी एक राष्ट्रीय पहचान भी है. ऐसे में मोदी और शाह के लिए उन्हें अस्थिर कर पाना या उत्तर प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन कर पाना आसान नहीं है.

सपा-बसपा महागठबंधन अगर बन जाता है और साल 2022 तक बना रहता है तो योगी का भी फिर से मुख्यमंत्री बनना खटाई में पड़ना तय है. लेकिन भाजपा में राष्ट्रीय स्तर पर भी यह माहौल बन रहा है कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह के बाद की भाजपा में योगी आदित्यनाथ अहम भूमिका में रह सकते हैं. क्योंकि इन दोनों के बाद की पांत में योगी आदित्यनाथ जैसा जनाधार वाला कोई और नेता दिखता नहीं है. और योगी आदित्यनाथ का राजनीतिक एजेंडा न सिर्फ भाजपा को बल्कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उसके दूसरे सहयोगी संगठनों के भी अनुकूल है.

गठबंधन राजनीति में स्वीकार्यता के मोर्चे पर योगी थोड़े कमजोर जरूर दिखते हैं लेकिन जिस तरह की अवसरवादिता इस दौर की राजनीति में दिख रही है, उसमें अगर नरेंद्र मोदी स्वीकार्य हो सकते हैं तो फिर योगी आदित्यनाथ के नाम पर भी किसी को कोई खास परेशानी क्यों होनी चाहिए!

विकास और गवर्नेंस के मोर्चे पर भी योगी आदित्यनाथ पहले के मुकाबले मजबूत दिख रहे हैं. उत्तर प्रदेश में न केवल उन्होंने कई बड़ी परियोजनाएं शुरू की हैं बल्कि एक सफल इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन भी कर चुके हैं. इसमें काॅरपोरेट जगत के सारे बड़े खिलाड़ी शामिल हुए थे. हालांकि इसमें जो वादे किये गये थे उनमें से कितने पूरे होते हैं, यह देखने वाली बात होगी.

पिछले कुछ समय से पुलिस एनकाउंटर्स को लेकर योगी आदित्यनाथ की आलोचना जरूर होती रही है लेकिन एक बड़ा वर्ग ऐसा भी है जो मानता है कि इस वजह से प्रदेश में कानून-व्यवस्था की हालत कुछ ठीक हुई है. इसके अलावा उनके विपक्षी भी अनौपचारिक बातचीत में यह मानते हैं कि वे अपेक्षाकृत भ्रष्टाचार मुक्त शासन देने में कामयाब रहे हैं.


महामुख्यमंत्री-2018 : देश के सबसे ताकतवर और प्रभावी 10 मुख्यमंत्री

#1 कमजोर मुख्यमंत्रियों वाले इस दौर में ममता बनर्जी अपवाद हैं

#2 नीतीश कुमार अभी भले कमजोर हैं लेकिन भविष्य में क्या होगा, कहा नहीं जा सकता

#3 विकास और गवर्नेंस के पैमाने पर चंद्रबाबू नायडू अभी भी बाकी मुख्यमंत्रियों से मीलों आगे हैं

#4 उपचुनावों में हार के बाद योगी आदित्यनाथ कमजोर होने के बजाय मजबूत हो गये हैं

#5 नवीन पटनायक और उनकी पार्टी की प्रकृति गठबंधन राजनीति से पूरी तरह मेल खाती है

#6-10 इनमें से दो मुख्यमंत्रियों के नाम शीर्ष पांच में भी हो सकते थे

महामुख्यमंत्री-2017 : देश के सबसे ताकतवर और प्रभावी 10 मुख्यमंत्री