अभिनेता अमिताभ बच्चन और उनकी बेटी श्वेता बच्चन नंदा के एक टीवी विज्ञापन से एक बैंक यूनियन के लोग नाराज हैं. ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कन्फेडरेशन (एआईबीओसी) नाम की इस यूनियन का कहना है कि कल्याण ज्वेलर्स के इस विज्ञापन के जरिए अमिताभ बच्चन और श्वेता ने बैंककर्मियों की नकारात्मक छवि पेश की है. यूनियन ने विज्ञापन को ‘घिनौना’ बताया है. उसने विज्ञापन में अमिताभ की भूमिका पर भी टिप्पणी की है. एआईबीओसी की तरफ से जारी एक वक्तव्य में कहा गया है, ‘(विज्ञापन में) बच्चन यह कहकर अपनी ईमानदारी का प्रदर्शन कर रहे हैं कि ईमानदारी तब नहीं दिखानी चाहिए जब कोई आपको देख रहा हो, बल्कि हमें तब भी ईमानदार होना चाहिए जब आपको कोई न देख रहा हो. लेकिन अमिताभ बच्चन शायद इस बात से अनजान थे कि स्क्रीन पर ऐसा करते हुए उन्होंने तमाम बैंककर्मियों का मजाक उड़ाया है.’

एआईबीओसी ने इस मामले में कल्याण ज्वेलर्स के खिलाफ कानूनी कदम उठाने की धमकी दी है. यूनियन के मुख्य सचिव सौम्य दत्ता के मुताबिक इस विज्ञापन को अपमान करने वाले तरीके से बनाया गया है और यह अपने व्यावसायिक लाभ के लिए बैंकिंग व्यवस्था के प्रति अविश्वास पैदा करता है. दत्ता ने कहा है, ‘हम कल्याण ज्वेलर्स के प्रबंधन और अमिताभ बच्चन से नाराज हैं. उन्होंने अपने फायदे के लिए बैंकों की नकारात्मक छवि पेश की है. हम इसे सभी बैंकों को बदनाम करने वाला विज्ञापन मानते हैं.’ यूनियन ने कल्याण ज्वेलर्स से बिना शर्त माफी मांगने की मांग की है, साथ ही कहा है कि अगर कंपनी ने जरूरी कदम नहीं उठाए तो उसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे.

उधर, यूनियन की नाराजगी पर कल्याण ज्वेलर्स की तरफ से भी प्रतिक्रिया आई है. एआईबीओसी को लिखे पत्र में उसने कहा है, ‘हम बैंककर्मियों की नकारात्मक छवि पेश किए जाने से जुड़ी आपकी भावना समझते हैं. लेकिन हम यहां आधिकारिक रूप से बताना चाहते हैं कि यह (विज्ञापन) पूरी तरह काल्पनिक था और हमारा यह दिखाने का कोई इरादा नहीं था कि सभी बैंक कर्मचारी एक जैसे होते हैं.’

क्या है विज्ञापन में?

इस विज्ञापन में एक बुजुर्ग (अमिताभ बच्चन) अपनी बेटी (श्वेता नंदा) के साथ किसी पेंशन संबंधी काम के लिए बैंक में आता है. बैंक के लोग इस बाप-बेटी को एक काउंटर से दूसरे काउंटर पर भेजते रहते हैं. फिर उन्हें बैंक मैनेजर के पास जाने को कहा जाता है. बैंक मैनेजर को बुजुर्ग की पासबुक देखकर पता चलता है कि उसके खाते में अतिरिक्त पैसा आ गया है. इस पर वह बुजुर्ग को इस पैसे से पार्टी करने की बात कहता है. लेकिन बुजुर्ग ऐसा करने से इनकार करते हुए बैंक मैनेजर को ईमानदारी का पाठ पढ़ाता है.