प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के कार्यकाल के आखिरी साल में अविश्वास प्रस्ताव पर अपेक्षा के अनुरूप ही सरकार को खास मुश्किल नहीं हुई. लेकिन विपक्षी नेताओं ने जिस तरह से अविश्वास प्रस्ताव पर बोला, उससे एक बात का स्पष्ट संकेत मिल रहा है - 2019 के लोकसभा चुनावों को विपक्ष किन मुद्दों पर ले जाने की योजना पर काम कर रहा है.

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से लेकर तृणमूल कांग्रेस के दिनेश त्रिवेदी और राष्ट्रीय जनता दल के जयप्रकाश नारायण यादव समेत दूसरे सभी विपक्षी नेताओं ने एक ही तरह के मुद्दों को उठाया. अलग-अलग नेताओं ने मुद्दों को पेश करने का तरीका भले अलग-अलग अपनाया हो लेकिन मुद्दे घुमा-फिराकर वही थे, जिन्हें राहुल गांधी ने बेहद आक्रामक ढंग से संसद में रखा.

राहुल गांधी ने अविश्वास प्रस्ताव पर बोलते हुए प्रभावी ढंग से यह मुद्दा उठाया कि 2014 के लोकसभा चुनावों के पहले भारतीय जनता पार्टी और नरेंद्र मोदी ने जो वादे किए थे, उन्हें मोदी सरकार ने पूरा नहीं किया. इसमें भी उन्होंने बड़ी चतुराई से वे मुद्दे ही उठाए जो सीधे आम लोगों के समझ में आ सकें. कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि हर व्यक्ति से नरेंद्र मोदी ने यह वादा किया था कि बैंक खाते में 15 लाख रुपये आएंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ. ऐसे ही उन्होंने नौजवानों को हर साल दो करोड़ रोजगार देने के वादे को भी उठाया.

कांग्रेस को मनमोहन सिंह सरकार के दूसरे कार्यकाल में भ्रष्टाचार के आरोपों को काफी झेलना पड़ा था. उस वक्त गुजरात के मुख्यमंत्री और भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर बेहद आक्रामक ढंग से कांग्रेस पर हमला बोला था. अविश्वास प्रस्ताव के दौरान भ्रष्टाचार के मुद्दे पर बोलते हुए राहुल गांधी भी उसी तरह से आक्रामक दिखे. उन्होंने राफेल सौदे का मसला उठाया और कहा कि फ्रांस सरकार को सौदे से संबंधित जानकारी सार्वजनिक किये जाने पर कोई आपत्ति नहीं है. मोदी सरकार फ्रांस के साथ एक समझौते का हवाला देकर राफेल सौदे की रकम को सार्वजनिक नहीं कर रही है. राहुल गांधी ने बगैर नाम लिए मोदी सरकार के खिलाफ यह आरोप भी लगाया कि इस सौदे से नरेंद्र मोदी के एक करीबी कारोबारी को 45,000 करोड़ रुपये का ठेका मिल गया. इसके अलावा अमित शाह के बेटे जय शाह का मसला भी राहुल गांधी ने इस तरह से उठाया कि आने वाले दिनों में वे इसे चुनावी सभाओं में और आक्रामक ढंग से उठाते हुए दिखे तो हैरानी नहीं होनी चाहिए.

ऐसे ही राहुल गांधी ने बड़ी चतुराई से ‘बड़े कारोबारी बनाम किसान’ को भी एक मुद्दा बनाने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि बड़े कारोबारियों का तो ढाई लाख करोड़ रुपये का कर्ज माफ हो गया लेकिन केंद्र सरकार किसानों का कर्ज माफ करने से सीधे तौर पर मना कर रही है. जिस आक्रामकता के साथ राहुल गांधी ने इस पर अपनी बात को रखा और बाद में दूसरे विपक्षी नेताओं ने भी इसे अपने भाषण में शामिल किया उससे साफ है कि चुनावी सभाओं में यह विपक्ष के मुख्य मुद्दों में से एक होने वाला है..

इसके अलावा राहुल गांधी ने देश भर में दलितों, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों का भी जिक्र किया. इन्हीं बातों दिनेश त्रिवेदी ने भी सर्वोच्च न्यायालय द्वारा कही गई बातों के जरिए उठाया. इसका मतलब यह निकाला जा रहा है कि भीड़तंत्र और दक्षिणपंथी संगठनों की हिंसा को भी विपक्ष चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी में है.

राहुल गांधी ने महिलाओं की सुरक्षा का मसला भी उठाया. उन्होंने कहा कि महिलाओं को सुरक्षा देने में नाकाम रहने की वजह से देश के बाहर भी भारत की छवि खराब हो रही है. कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद से राहुल गांधी लगातार महिलाओं से जुड़े मुद्दों को उठा रहे हैं. इसका बहुत लोग यह मतलब निकाल रहे हैं कि कांग्रेस अपने चुनावी अभियान में महिलाओं का खास भूमिका देखती है.

राहुल गांधी के भाषण में सांप्रदायिकता का मुद्दा नहीं था. इसका मतलब यह निकाला जा रहा है कि भाजपा चाहे चुनावों को जितना भी हिंदू-मुस्लिम के मुद्दे पर ले जाने की कोशिश करे कांग्रेस इसके चक्कर में न फंसने की पूरी कोशिश करने वाली है. विपक्ष के लिए अब सांप्रदायिकता के बजाय मोदी सरकार द्वारा उसके वादे नहीं पूरा किया जाना, भ्रष्टाचार और विकास ही अगले चुनाव के मुख्य मुद्दे रहने वाले हैं. एक संकेत यह भी मिल रहा है जिस तरह से सीधा हमला नरेंद्र मोदी 2014 के चुनावों में कर रहे थे उसी तरह के सीधे हमले की तैयारी नरेंद्र मोदी के खिलाफ राहुल गांधी और विपक्ष की ओर से चल रही है.

हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अविश्वास प्रस्ताव पर विपक्षी नेताओं के आरोपों का जवाब दिया और सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों का उल्लेख किया. उन्होंने अपनी सरकार की उपलब्धियों का बखान करते हुए कांग्रेस को उसके कार्यकाल में की गई गलतियों की याद भी दिलाई. लेकिन प्रधानमंत्री न तो राफेल के मसले पर कुछ बोले और न ही अमित शाह के बेटे जय शाह के मसले पर. प्रधानमंत्री ने नाम लिए बगैर राहुल गांधी के कई आरोपों को आधारहीन बताया लेकिन एक तथ्य यह भी है कि कांग्रेस अध्यक्ष ने जो मुद्दे उठाए, उनकी चर्चा अब देश के आम लोगों में भी हो रही है.