सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि आगामी एक सितंबर से कार या बाइक खरीदते वक्त उनका बहुवर्षीय थर्ड पार्टी इंश्योरेंस कराना अनिवार्य होगा. देश में बढ़ रहीं सड़क दुर्घटनाओं के मद्देनजर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश दिया. इस मामले में पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज केएस राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाले पैनल ने कोर्ट से कई सिफारिशें की थीं. जस्टिस एमबी लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने उन पर आदेश सुनाते हुए कहा कि कार की खरीद पर तीन साल और बाइक खरीदते समय पांच साल का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस करना जरूरी होगा.

बताया जा रहा है कि इस आदेश के बाद सड़क दुर्घटना के पीड़ितों को हादसे के लिए जिम्मेदार वाहन मालिक के पीछे पड़े बिना ही बीमा फर्मों से मुआवजा मिलने में मदद मिलेगी. पीठ ने बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण को भी निर्देश दिया है कि वह बीमा को मुख्य बीमा परिषद (जीआईसी) से जल्द से जल्द मंजूरी दिलाए. इस मामले में जीआईसी ने नीति तैयार करने के लिए आठ महीनों का समय लगने की बात कही थी. लेकिन कोर्ट ने इससे यह कह कर इनकार कर दिया कि बीमा को लेकर पैनल द्वारा उठाया गया मुद्दा अत्यंत चिंताजनक है.

दरअसल नई गाड़ी खरीदने के समय उसका थर्ड पार्टी इंश्योरेंस होता है. लेकिन एक साल का समय बीतने के बाद कई लोग बीमा रिन्यू नहीं कराते. ऐसे में अगर वाहन मालिक की गलती या लापरवाही की वजह से कोई व्यक्ति सड़क दुर्घटना में घायल हो जाए तो उसके लिए घटना के लिए जिम्मेदार व्यक्ति से मुआवजा पाना मुश्किल हो जाता है. पैनल की रिपोर्ट के मुताबिक थर्ड पार्टी से दीर्घकालीन (या बहुवर्षीय) बीमा कराने से इस तरह की दिक्कतें दूर हो जाएंगी.

इस मामले में बहुवर्षीय बीमा कराने की पैरवी करने वाले वकील गौरव अग्रवाल कहते हैं कि देश के 18 करोड़ पंजीकृत वाहनों में से 12 करोड़ का बीमा नहीं है. इनमें भारी वाहन भी शामिल हैं. गौरव कहते हैं, ‘बिना बीमा वाले 50 प्रतिशत वाहन दुपहिया हैं. आंकड़े बताते हैं कि ज्यादातर दुर्घटनाएं इन्हीं की वजह से होती हैं.’