तीन तलाक विधेयक को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार को समर्थन देने का मन बना लिया है, लेकिन इसके लिये उसने एक शर्त भी रख दी है. अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सुष्मिता देव ने कहा, ‘अगर सरकार गुजारा भत्ता का प्रावधान लाती है तो कांग्रेस इस बिल पर सरकार का समर्थन जरूर करेगी.’ सुष्मिता देव ने यह भी कहा है कि पार्टी तीन तलाक विरोधी विधेयक के खिलाफ कभी नहीं थी, लेकिन विधेयक का मौजूदा स्वरूप मुस्लिम महिलाओं को नुकसान पहुंचाने वाला है.

इस विधेयक में तीन बार ‘तलाक’ बोलकर तलाक कर लेने की व्यवस्था को अपराध की श्रेणी में रखा गया है. कानून तोड़ने वाले शख्स के लिये तीन साल जेल का प्रावधान किया गया है. कांग्रेस के समर्थन के साथ इस बिल को लोकसभा में दिसंबर में ही पास कर लिया गया था, लेकिन राज्यसभा में यह अभी तक पास नहीं किया जा सका है. सुष्मिता देव का कहना है कि, ‘बिल का मकसद यह सुनिश्चित करना होना चाहिए कि मुस्लिम महिलाओं को न्याय मिले, लेकिन इसमें पुरुषों के लिये जेल का प्रावधान ठीक नहीं है. पुरुष के जेल जाने के बाद उसकी पत्नी के आजीविका का क्या होगा सरकार को इस बारे में भी सोचना चाहिए.’

इसके पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने 16 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर महिला आरक्षण विधेयक को संसद में पारित किए जाने के लिए सहयोग करने को कहा था. उसके बाद कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने गांधी को पत्र लिखकर कहा था कि कांग्रेस महिला आरक्षण ही नहीं, बल्कि तीन तलाक, हलाला और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग संबंधी विधेयकों पर भी सरकार का साथ दे. इस पर कांग्रेस का आरोप है कि सरकार की ओर से सौदेबाजी की जा रही है और उसने अपने घोषणापत्र में यह नहीं कहा था कि महिला आरक्षण विधेयक के साथ तीन तलाक विधेयक को पारित किया जाएगा.