देशभर में मॉब लिचिंग की बढ़ती घटनाओं के बाद केंद्र सरकार ने इस मसले पर कानून बनाने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है. इस खबर को आज के अधिकतर अखबारों ने पहले पन्ने पर जगह दी है. केंद्रीय गृह सचिव राजीव गौबा की अध्यक्षता में गठित समिति को चार महीने में अपनी सिफारिशें सौंपनी हैं. साथ ही, गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में मंत्रियों का एक समूह भी बनाया गया है. यह समूह भी इस मुद्दे पर अपने सुझाव देगा. बीते हफ्ते सुप्रीम कोर्ट ने भीड़ की हिंसा से निपटने के लिए संसद को अलग से एक कानून बनाने को कहा था.

उधर, सुप्रीम कोर्ट ने एक आदेश जारी करते हुए कहा कि सरकार दिल्ली की जंतर-मंतर और बोट क्लब जैसी जगहों पर विरोध प्रदर्शन पर पूरी तरह से रोक नहीं लगा सकती. यह खबर भी अखबारों की प्रमुख सुर्खियों में शामिल है. शीर्ष अदालत ने इस बारे में एक याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि सरकार इन जगहों पर होने वाले विरोध प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए दिशा-निर्देश जारी कर सकती है. याचिकाकर्ताओं ने अपनी दलील में कहा था कि दिल्ली पुलिस कई वर्षों से इन क्षेत्रों में प्रदर्शन करने पर निषेधाज्ञा जारी करती रही है. उनके मुताबिक यह सीधे तौर पर शक्तियों का दुरुपयोग और प्रदर्शन करने के नागरिकों के मौलिक अधिकार का हनन है.

सांसद-विधायक के दोषी साबित होने के बाद स्टे न मिलने पर सदन की सदस्यता रद्द

आपराधिक छवि वाले सांसदों और विधायकों की मुश्किलें बढ़ती हुई दिख रही हैं. हिन्दुस्तान के पहले पन्ने पर प्रकाशित खबर की मानें तो यदि आपराधिक मामले में किसी सांसद या विधायक को दोषी साबित होने के बाद स्टे नहीं मिला तो वे सदन की सदस्यता के अयोग्य हो जाएंगे. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को यह टिप्पणी एक याचिका की सुनवाई करने के दौरान की. इस याचिका में कहा गया है कि लिली थॉमस मामले (2013) में शीर्ष अदालत के फैसले का ये जनप्रतिनिधि उल्लंघन कर रहे हैं और आपराधिक मामलों में दोष साबित होने के बाद भी उनकी संसद और विधानमंडल की सदस्यता बनी हुई है. इससे पहले 2013 के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा –आठ (चार) को रद्द कर दिया था. इस धारा में दोषी सांसदों-विधायकों की सदस्यता इस आधार पर बने रहने की बात कही गई थी कि उन्होंने दोष सिद्ध होने के तीन महीने के भीतर अपील दायर की हो.

केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने कालेधन से संबंधित रिपोर्टों को सार्वजनिक करने से इनकार किया

केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने कालेधन से संबंधित तीन रिपोर्टों को सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया है. अमर उजाला मे छपी खबर के मुताबिक इन रिपोर्टों को साझा करने से संसद के विशेषाधिकार का हनन होगा. मंत्रालय ने एक आरटीआई आवेदन के जवाब में बताया कि इसमें मांगी गई जानकारी आरटीआई कानून की धारा-आठ (1-सी) के दायरे से बाहर है, इसलिए यह संसदीय विशेषाधिकार हनन का मामला बनता है. हालांकि, वित्त मंत्रालय ने बताया है कि बीते साल 21 जुलाई को वित्तीय मामलों की स्थायी समिति ने इन रिपोर्टों को अपने कब्जे में ले लिया है.

कांग्रेस ने लोकसभा में विपक्ष के सांसदों की निगरानी का आरोप लगाया

कांग्रेस ने लोकसभा में विपक्ष के सांसदों की निगरानी का आरोप लगाया है. नवभारत टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रश्नकाल में कहा कि सत्ता पक्ष की ओर बनी ऑफिसर गैलरी से एक अधिकारी न केवल विपक्षी सांसदों की गिनती कर रहा है बल्कि, उसके बारे में नोट भी ले रहा है. लोकसभा में कांग्रेस के नेता का कहना था कि अधिकारी दीर्घा में बैठकर नोट नहीं लिख सकते. वहीं, संसदीय कार्य राज्यमंत्री अर्जुन मेघवाल ने बताया कि अधिकारी उनके मंत्रालय का है और ड्यूटी कर रहा है. संसद में ऑफिसर्स गैलरी आम तौर पर सत्ता पक्ष की बेंचों के पास होती है. इसका मकसद यह होता है कि गैलरी से अधिकारी मंत्रियों को सूचना देने में मदद कर सकें.

कांग्रेस ने सरकार पर राफेल सौदे को लेकर देश को गुमराह करने का आरोप लगाया

कांग्रेस ने मोदी सरकार पर राफेल सौदे को लेकर देश को गुमराह करने का आरोप लगाया है. पार्टी का कहना है कि 2008 में इस लड़ाकू विमान को लेकर भारत और फ्रांस के बीच हुए समझौते में गोपनीयता का कोई प्रावधान नहीं था. बिजनेस स्टैंडर्ड की खबर के मुताबिक पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी ने कहा कि सरकार को प्रत्येक विमान की कीमत का खुलासा करना होगा. उनका यह भी कहना था कि सरकार विमान की कीमत बताने से इनकार नहीं कर सकती क्योंकि, इस सौदे की नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) और संसद की लोक लेखा समिति (पीएसी) समीक्षा करेगी. वहीं, कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सरकार द्वारा इस मुद्दे पर संसद को गुमराह करने को लेकर विशेषाधिकार हनन का मामला बनने की बात कही है.