सुप्रीम कोर्ट ने लोकपाल को लेकर केंद्र सरकार द्वारा दिए गए हलफनामे को खारिज कर दिया है. लाइव लॉ के मुताबिक मंगलवार को शीर्ष अदालत ने कहा कि वह इससे संतुष्ट नहीं है और केंद्र सरकार चार हफ्ते के भीतर नया हलफनामा दाखिल करे. उसने इस पर नाराजगी जताई कि लोकपाल की नियुक्ति को लेकर न तो किसी सर्च कमेटी का गठन हुआ है और न ही इस काम के लिए कोई समय सीमा निर्धारित की गई है.

19 जुलाई को प्रधानमंत्री की अगुवाई में लोकपाल चयन समिति की बैठक हुई थी. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि वह लोकपाल के लिए नामों के चयन की प्रक्रिया में तेजी लाए. इसके बाद माना जा रहा था कि 19 जुलाई की बैठक में इस मुद्दे को लेकर बात आगे बढ़ सकती है. लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

कॉमन कॉज नाम के एक संगठन ने इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में एक अवमानना याचिका लगाई है. उसका कहना है कि बीते साल सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से लोकपाल की नियुक्ति करने को कहा था और इस आदेश का अब तक पालन नहीं हुआ है. इस बीच, कॉमन कॉज की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में पेश हो रहे चर्चित वकील प्रशांत भूषण ने कहा है कि अब एक ही रास्ता बचा है और वह यह है कि सुप्रीम कोर्ट संविधान के अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल कर खुद ही लोकपाल की नियुक्ति कर दे. हालांकि अदालत ने उनका सुझाव खारिज कर दिया.