पाकिस्तान के लिए आज का दिन काफी अहम है. आज पाकिस्तान की जनता अपने नए प्रधानमंत्री को चुनने के लिए मतदान कर रही है. इस चुनाव में 100 से ज्यादा राजनीतिक पार्टियां हिस्सा ले रही हैं. लेकिन, मुख्य मुकाबला इमरान खान, नवाज शरीफ और बिलावल भुट्टो जरदारी की पार्टी के बीच ही माना जा रहा है.

अगर पाकिस्तान की संसदीय प्रणाली और चुनावी प्रक्रिया की बात करें तो यह भारत से ज्यादा अलग नजर नहीं आती. भारत की संसद की तरह पाकिस्तान की संसद यानी ‘मजलिस-ए-शूरा’ में दो सदन होते हैं. निचले सदन को ‘नेशनल असेंबली’ और ऊपरी सदन को ‘सीनेट’ कहते हैं. वहां के निचले सदन को ‘कौमी इस्म्ब्ली’ और सीनेट को ‘आइवान-ए बाला’ भी कहा जाता है. ‘नेशनल असेंबली’ भारत की लोकसभा की तरह और सीनेट राज्यसभा की तरह होती है.

नेशनल असेंबली का चुनाव

भारत की लोकसभा में कुल 545 सदस्य होते हैं जिनमें दो मनोनीत किए जाते हैं. उधर, पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के सदस्यों की संख्या 342 है लेकिन, इनमें सिर्फ 272 सदस्यों को आम चुनाव के जरिए सीधे जनता चुनती है. इस तरह किसी भी पार्टी को सरकार बनाने के लिए 137 सीटों की जरूरत होती है. नेशनल असेंबली की जिन 70 सीटों पर चुनाव नहीं होता उनमें से 60 सीटें महिलाओं के लिए और 10 सीटें पारंपरिक और धार्मिक अल्‍पसंख्‍यक समुदाय के लिए आरक्षित होती हैं. इन आरक्षित सीटों में से किस पार्टी को कितनी सीटें मिलेंगी इसका फैसला आनुपातिक प्रतिनिधित्व नियम के तहत होता है.

आनुपातिक प्रतिनिधित्व नियम के जरिए आम चुनाव में पार्टियों द्वारा जीती गईं सीटों के अनुपात में 70 आरक्षित सीटों को बांट दिया जाता है. यानी जिस पार्टी ने सबसे ज्यादा सामान्य सीटें जीती हैं, उसके उतने ही ज्यादा उम्मीदवार आरक्षित सीटों से सांसद बनते हैं. इन सांसदों को बिना किसी वोटिंग प्रक्रिया के सीधे नेशनल असेंबली के लिए चुन लिया जाता है.

पाकिस्तान के लाहौर में वोट डालते पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के भाई और पीएमएल-एन के मुखिया शाहबाज शरीफ | फोटो : एएफपी
पाकिस्तान के लाहौर में वोट डालते पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के भाई और पीएमएल-एन के मुखिया शाहबाज शरीफ | फोटो : एएफपी

पाकिस्तान में नेशनल असेंबली के सदस्यों को मेंबर ऑफ नेशनल असेंबली (एमएनए) कहा जाता है. भारत की तरह ही पाकिस्तान में भी निचले सदन के सदस्यों का कार्यकाल पांच साल के लिए होता है. नेशनल असेंबली में तीन प्रमुख पद होते हैं जिनमें प्रधानमंत्री और नेता विपक्ष के साथ स्पीकर का पद भी शामिल होता है.

भारत से अलग पाकिस्तान में राज्यों और नेशनल असेंबली के चुनाव साथ-साथ होते हैं. इस बार भी पंजाब, सिंध, खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान प्रांत के लोग देश की सरकार के साथ अपने प्रांत की सरकार को भी चुनेंगे.

किन राज्यों में आम चुनाव होते हैं?

पाकिस्तान में आम चुनाव यहां के चार सूबों और दो केंद्र शासित प्रांतों में होते हैं. पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और गिलगित बाल्टिस्तान को स्वायत्तता हासिल है और इसी वजह से वहां के चुनाव अलग कराए जाते हैं. सीटों के लिहाज से आम चुनावों में पंजाब और सिंध की भूमिका सबसे अहम मानी जाती है. 272 सीटों में से पंजाब में 141, सिंध में 61, खैबर-पख्तूनख्वा में 39, बलूचिस्तान में 16, फाटा यानी संघ शासित राज्यों में 12 सीट और राजधानी इस्लामाबाद में तीन सीटों पर चुनाव होता है.

अन्य आंकड़े

पाकिस्तान के चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार देश में कुल 107 रजिस्टर्ड राजनीतिक पार्टियां हैं जिनमें से महज़ 30 ही सक्रिय रूप से राजनीति में हैं. इस बार इन पार्टियों के कुल 3459 उम्मीदवार नेशनल असेंबली के इन चुनावों में हिस्सा ले रहे हैं. इनमें कट्टरपंथी संगठनों से जुड़े 460 उम्मीदवार मैदान में हैं, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड संख्या बताई जा रही है.

लाहौर में ही एक मतदान केंद्र पर वोट डालने के लिए अपनी बारी का इन्तजार करती महिलाएं | फोटो : एएफपी
लाहौर में ही एक मतदान केंद्र पर वोट डालने के लिए अपनी बारी का इन्तजार करती महिलाएं | फोटो : एएफपी

चुनाव आयोग के मुताबिक चार प्रांतों में विधानसभा की 577 सीटों के लिए 8396 उम्मीदवार भी मैदान में है. देश में कुल रजिस्टर्ड वोटरों की संख्या 10 करोड़ 60 लाख है. धर्म के आधार पर 96.28 फीसदी मुसलमान, 1.59 फीसदी ईसाई, 1.6 फीसदी हिंदू और 0.58 फीसदी बाकी धर्मों के लोग हैं. इस चुनाव में मतदाताओं के लिए करीब 85, 000 पोलिंग स्टेशन बनाए गए हैं.

उच्च सदन सीनेट का चुनाव

पाकिस्तानी संसद के उच्च सदन सीनेट में कुल 104 सदस्‍य होते हैं. सीनेट के सदस्यों का कार्यकाल छह साल का होता है. सीनेट का चुनाव पाकिस्तानी संविधान के अनुच्छेद 59 के तहत कराया जाता है. प्रत्येक प्रांतीय असेंबली यानी विधानसभा कुल 23-23 सीनेट सदस्यों का चुनाव करती है. इनमें 14 सामान्य सीटें, चार टेक्नोक्रेट या उलेमा, चार महिलाएं और एक गैर मुस्लिम सीट शामिल है. संघीय राजधानी इस्लामाबाद से चार सीनेटर चुने जाते हैं जिनमें दो सामान्य वर्ग, एक टेक्नोक्रेट या उलेमा और एक सीट महिला के लिए आरक्षित होती है. इसके अलावा आठ सदस्यों का चुनाव संघ शासित राज्यों (फाटा) से किया जाता है. सीनेट को ऐसे कई विशेष अधिकार दिए गए हैं जो नेशनल असेंबली के पास नहीं हैं.

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