रूस और अमेरिका के बीच संभवत: शीतयुद्ध के बाद से ऐसी नज़दीकी पहली बार ही आई हो, जो अब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और उनके अमेरिकी समकक्ष डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में दिख रही है. दोनों ही राष्ट्रपतियों ने एक-दूसरे को अपने-अपने देश की यात्रा के लिए आमंत्रित किया है. साथ ही एक-दूसरे का न्यौता भी स्वीकार करने के संकेत दिए हैं.

ख़बरों के मुताबिक दक्षिण अफ्रीका के जोहानिसबर्ग में ब्रिक्स (ब्राज़ील, रूस, इंडिया, चाइना, साउथ अफ्रीका) शिखर सम्मेलन से इतर मीडिया से बातचीत में शुक्रवार को पुतिन ने कहा, ‘मैंने डोनाल्ड ट्रंप को मॉस्को आने का न्यौता दिया है. मैं तथा अमेरिकी राष्ट्रपति दोनों ही आगे और मुलाकातें करने को तैयार हैं.’ इससे पहले शुक्रवार को ही अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यालय की प्रेस सचिव सराह सैंडर्स ने भी एक बयान जारी किया. इसमें उन्होंने बताया, ‘राष्ट्रपति ट्रंप वॉशिंटन में पुतिन का स्वागत करने की राह देख रहे हैं. वे मॉस्को जाने के लिए भी राज़ी हैं.’ इस पर भी पुतिन ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा, ‘मैं वॉशिंगटन जाने के लिए बिल्कुल तैयार हूं. पर इसके लिए दोनों देशाें में हमें उचित माहौल बनाना होगा.’

याद रखना होगा कि रूस के नेतृत्व वाले सोवियत संघ के समय से ही अमेरिका उसका प्रबल वैश्विक प्रतिद्वंद्वी रहा है. हालांकि सोवियत संघ के विघटन के बाद हालात बदले. रूस की ताक़त कुछ कम हुई लेकिन वह अमेरिका के लिए चुनौती बना रहा. अलबत्ता जब जबकि अमेरिका को चीन से ज़्यादा ख़तरा नज़र आ रहा है तो वह रूस से नज़दीकी बढ़ा रहा है. डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में इस घनिष्ठता के बढ़ने की संभावना और ज़्यादा बनती है क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति के तौर पर उनके चुनाव में रूस की दख़लंदाज़ी का योगदान भी माना जा रहा है. अमेरिका में इसकी जांच चल रही है. इसके बावज़ूद अभी 16 जुलाई को ट्रंप और पुतिन की फिनलैंड की राजधानी हेलसिंकी में मुलाकात हुई थी.

वैसे तो यह द्विपक्षीय हेलसिंकी शिखर वार्ता भी हालांकि विवादों में रही. पर फिर भी दोनों देशों ने संबंध सहज़ करने के लिए ऐसी और मुलाकातें करने का फैसला किया. दोनों के बीच ताज़ा सकारात्मक बयानबाज़ी उसी का नतीज़ा है. इस बयानबाज़ी में एक और कड़ी जोड़ते हुए अमेरिका के रक्षा मंत्री जिम मैटिस ने भी कहा है कि वे जल्द ही अमेरिकी और रूसी रक्षा मंत्रियों के बीच वार्ता के बारे में विचार कर रहे हैं.