सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) में खाली पड़े पदों को लेकर कड़ा एतराज जताया है. शुक्रवार को शीर्ष अदालत ने केंद्र से चार हफ्तों के भीतर हलफनामा देकर यह बताने को कहा कि इन पदों को कब भरा जा जाएगा. इस खबर को आज के कई अखबारों ने पहले पन्ने पर जगह दी है. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा है कि 2016 में खाली पदों के संबंध में अधिसूचना जारी होने के बाद भी अब तक ये पद खाली क्यों हैं. इस समय केंद्रीय सूचना आयोग में चार पद खाली हैं. वहीं, शीर्ष न्यायालय ने महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गुजरात, केरल, ओडिशा और कर्नाटक को भी राज्य सूचना आयोगों में खाली जगह भरने के लिए इसी तरह का हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए हैं.

डेटा सुरक्षा कानून पर सुझावों के साथ पूर्व न्यायाधीश बीएन श्रीकृष्ण समिति ने अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंप दी है. यह खबर भी अखबारों की प्रमुख सुर्खियों में शामिल है. पूर्व न्यायाधीश श्रीकृष्ण ने कहा, ‘नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा होनी चाहिए और इस मामले में सरकार की जिम्मेदारियां क्या हों, यह भी तय होना चाहिए. लेकिन डेटा की सुरक्षा कारोबार और उद्योग जगत की कीमत पर नहीं हो सकती.’ वहीं, केंद्रीय कानून और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सरकार इस रिपोर्ट का अध्ययन करेगी और सभी पक्षों के सुझाव लेगी. इसके बाद इसके बाद इसे विधेयक की शक्ल में कैबिनेट के सामने रखा जाएगा.

बीते तीन साल के दौरान उच्च शैक्षणिक संस्थानों में शिक्षकों की संख्या में 2.34 लाख की कमी

बीते तीन साल के दौरान देश के उच्च शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ाने वाले शिक्षकों की संख्या में 2.34 लाख की कमी आई है. द हिंदू ने ऑल इंडिया सर्वे ऑन हायर एजुकेशन रिपोर्ट के हवाले से कहा है कि शैक्षिक सत्र 2015-16 में इनकी संख्या 15.18 लाख थी. वहीं, 2017-18 में यह घटकर 12.84 रह गई है. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के पूर्व अध्यक्ष एसके थोराट ने अखबार को बताया कि ऐसा लगता है जैसे केंद्रीय और राज्यों में स्थित विश्वविद्यालयों में खाली पदों को नहीं भरा जा रहा है. वहीं, केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि 2017-18 में शिक्षकों की संख्या के गिरावट के पीछे आधार है. उन्होंने बताया कि इस सर्वे में केवल उन्हीं शिक्षकों को शामिल किया गया जिन्होंने अपना आधार संख्या उपलब्ध करवाई है.

‘सुप्रीम कोर्ट सीबीआई के सांप-सीढ़ी के खेल से थक चुका है’

सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर फर्जी मुठभेड़ मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को लेकर अपना रुख और सख्त कर लिया है. अमर उजाला की खबर के मुताबिक इस मामले की जांच से नाराज शीर्ष अदालत ने सीबीआई निदेशक को 30 जुलाई को पेश होने के लिए कहा है. अदालत ने कहा है कि वह सीबीआई के सांप-सीढ़ी के खेल से थक चुकी है. न्यायाधीश मदन बी लोकुर और न्यायाधीश यूयू ललित की पीठ ने कहा कि अदालत यह भी जानना चाहती है कि किस तरीके से जांच को अंजाम दिया जा रहा है. बताया जाता है कि 27 जुलाई को चार मामलों की अंतिम जांच रिपोर्ट पेश की जानी थी. लेकिन, सीबीआई ने एक भी मामले की जांच रिपोर्ट पूरी नहीं कर पाई है. मणिपुर में साल 2000 से 2012 के बीच सुरक्षा बलों और पुलिस पर कथित रूप से 1528 फर्जी मुठभेड़ों और न्यायिक हत्याओं का आरोप है.

बिहार : मुजफ्फरपुर बालिका गृह बलात्कार मामले में पीड़ित बच्चियों की आपबीती

बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित बालिका गृह बलात्कार मामले में पीड़ित बच्चियों ने न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने अपनी आपबीती सुनाई है. एक 10 साल की बच्ची ने बताया, ‘जैसे ही सूरज डूबता था, लड़कियां डरी हुई रहती थीं. वे रातें आतंक से भरी हुई थीं.’ नवभारत टाइम्स में प्रकाशित खबर के मुताबिक इस मामले में बच्चियां ‘नेताजी’ और ‘हंटरवाला अंकल’ का नाम ले रहीं हैं. माना जा रहा है कि नेताजी बिहार सरकार में मंत्री मंजू वर्मा के पति चंद्रेश्वर वर्मा हैं. वहीं, हंटरवाला अंकल बालिका गृह के संचालक ब्रजेश ठाकुर है. इस मामले में एक अन्य बच्ची ने बताया, ‘हमें टॉर्चर किया जाता था. भूखा रखा जाता था. इंजेक्शन लगाए जाते थे. हर रात लड़कियों के साथ रेप होता था.’ इसके अलावा एक अन्य लड़की ने बताया, ‘कई बार मुझे बालिका गृह से बाहर ले जाया जाता था. मुझे नहीं पता वो लोग कहां ले जाते थे. इसके बाद अगले दिन वापस लाया जाता था.’ इस मामले में आरोपित ब्रजेश ठाकुर सहित चार को गिरफ्तार किया गया है. वहीं, राज्य सरकार ने मामले की सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं. दूसरी ओर, विपक्ष पटना हाई कोर्ट की निगरानी में इसकी सीबीआई जांच की मांग कर रहा है.

अमेरिका : अभी भी 700 बच्चे अपने माता-पिता से अलग

अमेरिका में मैक्सिको सीमा पर अपने मां-पिता से अलग किए गए 700 बच्चे अभी भी सरकार के संरक्षण में हैं. हिन्दुस्तान में छपी खबर के मुताबिक अमेरिकी प्रशासन ने बताया कि तय समय-सीमा खत्म होने के बाद भी इन बच्चों को उनके परिवार से नहीं मिलवाया गया है. वहीं, कैलिफोर्निया की एक संघीय अदालत के न्यायाधीश ने आदेश दिया है कि पात्रता रखने वाले सभी परिवारों को एकजुट किया जाए. प्रशासन ने अदालत को बताया कि पांच साल और इससे अधिक उम्र के 1442 बच्चों को उनके परिवारों को मिलवाया गया है.