दक्षिण कोरिया की प्रमुख वाहन निर्माता कंपनी ह्यंडुई को इस हफ्ते भारत में 20 साल पूरे हो गए. भारत में ह्युंडई ने अपनी सफ़र की शुरुआत 1998 में अपनी लोकप्रिय हैचबैक सेंट्रो के साथ की थी. इसके बाद कंपनी ने कभी मुड़कर पीछे नहीं देखा. इस दौरान ह्युंडई देश के बाजार में शानदार प्रदर्शन करते हुए दूसरे स्थान पर पहुंच गई. वर्ष 2017 (जनवरी-दिसंबर) में कंपनी ने 5,27,320 यूनिट की बिक्री की और यह आंकड़ा तीसरे पायदान पर रही महिंद्रा एंड महिंद्रा से दोगुना था. हालांकि बाज़ार से मिली जबरदस्त प्रतिक्रिया के बावजूद ह्युंडई इस मामले में अभी मारुति-सुज़की से काफी पीछे है. पिछले साल मारुति ने 16,02,522 कारें बेचीं थीं.

ख़बरों के मुताबिक भारत में अपने 20 साल पूरे होने पर कंपनी एक बार फिर सेंट्रो जैसी नई हैचबैक उतारने की तैयारी में है. कयास लगाए जा रहे हैं कि यह कार सेंट्रो की ही नई जेनरेशन होगी. हालांकि इस नई कार का नाम अभी तक तय नहीं किया गया है. इस 16 अगस्त से ह्युंडई एक डिजिटल कैंपेन शुरु कर ग्राहकों से इस नई कार के नाम को लेकर सुझाव मांगेगी.

इसके अलावा भारत में अपनी बीसवीं सालगिरह के मौके पर कंपनी ने 2020 तक आठ नई कारें लॉन्च करने की भी घोषणा की है. बताया जा रहा है कि इनमें से दो कारों के साथ ह्युंडई दो नए सेगमेंटों में एंट्री करेगी, जबकि पांच कारें फुल-मॉडल बदलाव के साथ बाज़ार में उतारी जाएंगी. इन कारों में एक नई सबकॉम्‍पैक्ट और एक इलेक्ट्रिक एसयूवी भी शामिल होगी. सूत्रों के मुताबिक अगले साल की दूसरी छमाही में ह्युंडई भारत में ही निर्मित इलेक्ट्रिक एसयूवी पेश कर सकती है.

मारुति-सुज़की का नया कीर्तिमान

देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति-सुज़ुकी ने एक बार फिर नया कीर्तिमान रचा है. इस सप्ताह कंपनी ने भारत में दो करोड़ यूनिट वाहनों के उत्पादन का आंकड़ा पार कर लिया है. यह उपलब्धि हासिल करने वाली मारुति-सुज़की देश की पहली कंपनी है. और हाल-फिलहाल कोई दूसरी कंपनी इस आंकड़े के आस-पास भी नहीं दिखती. कंपनी के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास हो जाती है क्योंकि इस साल वह अपनी पैंतीसवीं सालगिरह मनाने जा रही है. मारुति-सुज़की ने भारत में 16 दिसबंर 1983 को आम आदमी की पहली कार कही जाने वाली ‘एसएस80’, जिसे आप-हम ‘मारुति 800’ के नाम से भी जानते हैं, के साथ अपने सफ़र की शुरुआत की थी.

इसके करीब दो दशक बाद ही अप्रैल 2005 में कंपनी ने 50 लाख कारें बनाने का आंकड़ा पार कर लिया था और अगले छह वर्षों में कंपनी ने एक करोड़ वाहन बेचने के साथ एक नया मुकाम हासिल किया. वित्त वर्ष 2017-18 में कंपनी का सालाना बिक्री का आंकड़ा 15 लाख से बढ़कर 17.7 लाख यूनिट तक पहुंच गया है. जानकार इसका श्रेय हाल ही में लॉन्च हुई कंपनी की शानदार कारों- विटारा ब्रेज़ा, बलेनो, डिज़ायर और स्विफ्ट को दे रहे हैं.

इस मौके पर मारुति-सुज़ुकी इंडिया के निदेशक केनिची अयुकावा ने खुशी ज़ाहिर करते हुए कहा, ‘हम अपने सभी ग्राहकों, साझेदारों, सरकार, निवेशकों और स्टॉक होल्डरों का शुक्रिया अदा करना चाहते हैं. हमारी यह उपलब्धि लोगों के हम में जताए गए विश्वास की बानगी है. तीन दशक से भी ज़्यादा समय से मारुति-सुज़ुकी अपने ग्राहकों की मांग को ध्यान में रखते हुए वैश्विक स्तर के उत्पाद मुहैया कराने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है. हम अपने ग्राहकों को उत्पाद से लेकर उनकी सर्विस मुहैया कराने के लिए तत्पर हैं.’

इलेक्ट्रिक कारों में इस्तेमाल की जाने वाली बैटरी की कीमत घटी

2030 तक पूरी तरह इलेक्ट्रिक कारों पर निर्भर होने की अपनी कवायद में भारत सरकार खासी मुस्तैद दिख रही है. इस सप्ताह हुई जीएसटी काउंसिल की बैठक में इलेक्ट्रिक कारों में इस्तेमाल की जाने वाली लीथियम-आयन बैटरी पर लगने वाले जीएसटी को 28 से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है. हालांकि जानकार इस कटौती के और ज्यादा होने के कयास लगा रहे थे. पिछले करीब एक दशक में भारत में बैटरी की कीमतों में तेजी से कमी देखने को मिली है. जहां 2010 में यह 1000 डॉलर/किलोवाट थी वहीं 2018 में घटकर 225-250 डॉलर तक पहुंच गई.

विश्लेषकों का कहना है कि इस कटौती के चलते इलेक्ट्रिक वाहनों का किफायती होना तय है. फिलहाल देश के बाज़ार में जहां दो-पहिया इलेक्ट्रिक वाहनों की एक लंबी सूची है वहीं ऑटोमोबाइल कंपनियां इलेक्ट्रिक कारें बनाने की दिशा में तेजी से जुटी हुई हैं. फिलहाल बाजार में टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा टिआगो इलेक्ट्रिक और ईवेरिटो जैसी कारों का निर्माण कर रही हैं. इसके अलावा महिंद्रा की छोटे आकार की इलेक्ट्रिक कार ई2ओ प्लस भी प्रचलन में है.

हालांकि जुलाई के पहले सप्ताह में ही केंद्रीय मंत्रियों और अधिकारियों ने 2030 तक पूरी तरह इलेक्ट्रिक कारों पर निर्भर होने की केंद्र सरकार की योजना को बड़ा झटका दिया था. इन अधिकारियों और मंत्रियों को उपयोग के लिए जो इलेक्ट्रिक सेडान कारें उपलब्ध करवाई गई थीं उनके इस्तेमाल से इन्होंने मना कर दिया. अधिकारियों के लिए राज्य सरकारों द्वारा चलाई जाने वाली एनर्जी एफिशिएंसी सर्विस लिमिटेड (ईईएसएल) ने महिंद्रा-एंड-महिंद्रा और टाटा मोटर्स की इलेक्ट्रिक कारें उपलब्ध करवाई थीं जो उन्हें पसंद नहीं आईं.

सूत्र के हवाले से एक प्रमुख समाचार वेबसाइट का कहना है कि अधिकारियों द्वारा इलेक्ट्रिक कारों को नापसंद करने के पीछे इन कारों का खराब प्रदर्शन और कम बैटरी रेंज है. जानकारों का कहना है कि पूरा चार्ज करने के बावजूद टाटा टिगोर ईवी और महिंद्रा ई-वेरिटो सिटी 80-82 किमी/घंटा की रफ़्तार पर चलने में भी असमर्थ हैं. दरअसल इन कारों में ग्लोबल स्टैंडर्ड की तुलना में कम क्षमता वाली बैटरी के इस्तेमाल किए जाने की ख़बरें आई हैं जिनके मुताबिक इन दोनों ही कारों में ग्लोबल मानक यानी 27-35 किलोवॉट के मुकाबले 17 किलोवॉट की ही बैटरी दी गई है.