भारत और इंग्लैंड के बीच पांच मैचों की टेस्ट सीरीज बुधवार से शुरू हो गई. किस टीम का पलड़ा भारी रहेगा, इस चर्चा का अंत विशेषज्ञ यह कहकर कर रहे हैं कि क्रिकेट अनिश्चितताओं का खेल है. लेकिन इससे इतर भारत के खिलाफ पहले टेस्ट के लिए चुनी गई इंग्लैंड की टीम में एक खिलाड़ी के चयन को लेकर इंग्लिश मीडिया में बयानबाजी का दौर चल रहा है. विवाद का सबब बना है-इंग्लैंड टेस्ट टीम में लेग स्पिनर आदिल रशीद का चयन.

आदिल रशीद इंग्लिश क्रिकेट का एक जाना पहचाना नाम हैं. हाल ही में भारत के खिलाफ टी-20 और एक दिवसीय मुकाबलों में वे इंग्लैंड की टीम के लिए खेले थे. तो आखिर टेस्ट टीम में उनके चयन पर इतना विवाद क्यों मचा है?

इंग्लैंड के कई दिग्गज क्रिकेटरों ने अादिल के टेस्ट टीम में चयन को गलत बताया है. इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल वॉन ने आदिल के चयन को हास्यास्पद ठहराया. द टेलीग्राफ में लिखे अपने स्तंभ में उन्होंने इसे इंग्लैंड के काउंंटी क्रिकेट की पीठ में छुरा घोंपने जैसा बताया है. माइकल वॉन के अलावा इंग्लिश मीडिया और बहुत सारे क्रिकेट प्रेमियों ने भी आदिल के चयन पर नाखुशी जाहिर की है. आदिल जिस यार्कशायर काउंटी के लिए क्रिकेट खेलते हैं, उसके प्रबंधन ने भी आदिल के टेस्ट टीम में चयन की आलोचना की.

आदिल के टेस्ट टीम में चयन को लेकर जो विरोध शुरू हुआ,उसके पीछे कई वजहें हैं. सबसे बड़ा सवाल यह उठाया जा रहा है कि आदिल टेस्ट क्रिकेट को लेकर कितने गंभीर हैं. आदिल ने 2015 में पहला टेस्ट मैच पाकिस्तान के खिलाफ खेला था और 2016 में उन्होंने चेन्नई में अपना अंतिम टेस्ट खेला. करीब एक साल में अादिल ने इंग्लैंड के लिए 10 टेस्ट खेले. लेकिन उसके बाद उन्होंने क्रिकेट बोर्ड को बता दिया कि वे रेड बॉल क्रिकेट (टेस्ट मैच) के लिए उपलब्ध नहीं हैं और अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सिर्फ वन डे और बीसम-बीस क्रिकेट ही खेलेंगे.

आलोचकों का कहना है कि जो खिलाड़ी दो साल पहले ही टेस्ट क्रिकेट खेलने से अनिच्छा जता चुका है, उसका टेस्ट टीम में चयन कितना उचित है. टेस्ट क्रिकेट में जिस तरह की परिपक्वता और मानसिक दृढ़ता की जरुरत होती है क्या वह आदिल में हैं? क्रिकेट कमेंटेटर हर्षा भोगले भी इस चयन से चिंतित नजर आते हैं. एक बातचीत में उन्होंने कहा, ‘आदिल का इंग्लैंड टीम में चयन यह बताता है कि लाल गेंद से खेले जाने वाले टेस्ट क्रिकेट में सफेद गेंद (वनडे-टी 20) से खेले जाने वाले खेल का महत्व बढ़ता जा रहा है.’ हर्षा इसे क्रिकेट के शुद्धतम फार्मेट की गिरती गुणवत्ता से जोड़ रहे थे. इंग्लैंड के चयनकर्ता आदिल के चयन का अाधार भी उसके एकदिवसीय टी-20 में प्रदर्शन को बता रहे हैं.

इन बातों के अलावा आदिल के चयन में एक पेंच नियम-कानून का भी फंसता है. आदिल ने इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड को लंबे फार्मेट के लिए अपने को अनुपलब्ध बताया, उसके बाद बोर्ड के साथ उनका जो अनुबंध हुअा वह लंबे फार्मेट के बजाय सिर्फ वनडे और टी-20 के खिलाड़ी के तौर पर था. सवाल है कि फिर उनका चयन टेस्ट टीम में कैसे हुआ. इंग्लैंड के पूर्व कप्तान नासिर हुसैन का कहना है, ‘आदिल के चयन से दूसरे खिलाड़ियों में गलत संदेश जाएगा. कोई एेसा कैसे कर सकता है कि कभी कहे मुझे टेस्ट खेलने हैं और कभी कहे कि नहीं खेलने हैं.’

इस पूूरे प्रकरण से एक और गफलत हुई. आदिल ने जब टेस्ट क्रिकेट खेलने में असमर्थता जताई थी तो मान लिया गया कि उन्होंने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले लिया है. लेकिन जब उनके टेस्ट टीम में चयन के बाद सवाल उठे कि आखिर एक संन्यास ले चुके खिलाड़ी को टेस्ट टीम में क्यों चुना गया तो आदिल ने इस बात से इन्कार कर दिया कि उन्होंने टेस्ट से संन्यास लिया था. हालांकि इस तकनीकी विवाद पर इंग्लिश क्रिकेट बोर्ड ने कहा है कि अगर अादिल अपने अनुबंध में टेस्ट खेलने वाली बात नहीं जोड़ते हैं तो 2019 के सत्र से उन्हें टेस्ट टीम में शामिल नहीं किया जाएगा.

सवाल यह भी उठता है कि जब इंग्लैंड के पास मोइन अली के अलावा डॉमिनिक बेस जैसे स्पिनर मौजूद थे तो चयनकर्ताओं को आदिल ही क्यों सूझे. दरअसल, आदिल के टेस्ट टीम में चयन की चर्चा तीसरे वनडे में तब चल निकली जब उन्होंने विराट कोहली को एक शानदार गेंद पर आउट किया. विराट भौचक्के रह गए और गेंद ने उनका अॉफ स्टंप उड़ा दिया. तमाम क्रिकेट प्रेमियों ने आदिल की इस गेंद की तुलना बॉल अॉफ सेंचुरी कही जाने वाली उस गेंद से की जिस पर 1993 की एशेज सीरिज में शेन वार्न ने माइक गेटिंग का विकेट चटकाया था.

पहले और दूसरे वनडे में भी आदिल बढ़िया प्रदर्शन कर चुके थे. इसके बाद इंग्लैंड के मुख्य चयनकर्ता ईडी स्मिथ ने उनसे टेस्ट खेलने के बारे में पूछा तो आदिल ने हां कर दी. इस तरह वे दो साल बाद इंग्लैंड की टेस्ट टीम में फिर आ गए .

आदिल ने इंग्लैंड के लिए जो 10 टेस्ट खेलकर 38 विकेट झटके उनमें से ज्यादातर उन्होंने भारतीय उप-महाद्वीप में खेले. टेस्ट के लिहाज से यह प्रदर्शन बहुत हैरतअंगेज नहीं तो बहुत खराब भी नहीं है. आदिल के अालोचक कहते हैं कि उनका यह प्रदर्शन उन पिचों पर रहा है जहां स्पिनर्स के लिए मददगार पिच होती हैं. लेकिन इसका दूसरा पहलू भी है. अगर भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका के विकेट स्पिन गेंदबाजों को मदद करते हैं तो यहां के बल्लेबाज स्पिन को दुनिया में सबसे बेहतर खेलते भी हैं. इन्हीं सब के चलते मोइन अली के साथ आदिल को टीम में शामिल किया गया है कि शायद वे स्पिन खेलने में सिद्धहस्त भारतीय बल्लेबाजों के सामने मुश्किल पैदा कर सकें.

तमाम दिग्गज खिलाड़ियों के विरोध के बाद आदिल के लिए समर्थन की आवाजें भी उठी हैं. पूर्व इंग्लिश कप्तान एलिस्टर कुक ने आदिल के समर्थन में कहा, ‘मुझे लगता है कि अब वे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के लिए परिपक्व हो गए हैं और उनका चयन एक साहसिक निर्णय है.’ माइकल वॉन केे बयान पर इंग्लैंड के महान क्रिकेटर ने इयान बॉथम ने कहा, ‘मैं नहीं समझ पा रहा हूं वो क्या कह रहे हैं. लेकिन वो जो कह रहे हैं वह गैरजरूरी है.’

अब यह देखना है कि अपने चयन पर विवाद और सुर्खियांं बटोरने वाले आदिल अपने प्रदर्शन से भी सुर्खियांं बटोर पाते हैं या नहीं. लेकिन इसके लिए जरूरी है कि उन्हें पहले मैच के अंतिम 11 में जगह मिले और वे बाकी मैचों के लिए अपनी दावेदारी साबित कर सकें.