असम में रहने वाले करीब 40 लाख लोगों पर उनकी नागरिकता खत्म होने का संकट मंडरा रहा है. सोमवार को जारी नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस (एनआरसी) में इन्हें शामिल नहीं किया गया है. इस खबर को आज के अधिकतर अखबारों ने पहले पन्ने पर जगह दी है. इस मसौदे में राज्य में रहने वाले 3.29 करोड़ लोगों में से 2.89 करोड़ को ही भारतीय नागरिक माना गया है. बताया जाता है कि एनआरसी से बाहर लोगों को अपनी नागरिकता साबित करने के लिए दो और मौके दिए जाएंगे. असम देश का अकेला राज्य है जहां नागरिकों का रजिस्टर तैयार किया जाता है.

झारखंड के रांची में एक ही परिवार के सात लोगों द्वारा सामूहिक खुदकुशी करने की खबर भी अखबारों की प्रमुख सुर्खियों में शामिल है. स्थानीय पुलिस के मुताबिक इस घटना के मरने वालों में दीपक झा नाम का एक शख्स, उसकी पत्नी, माता-पिता, भाई और दो बच्चे शामिल हैं. दीपक झा का परिवार यहां किराये के एक मकान में रहता था और आर्थिक तंगी से जूझ रहा था. रांची के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अनीश गुप्ता ने बताया कि शुरुआती जांच में यह आत्महत्या का मामला लग रहा है लेकिन, पुलिस को मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है. ऐसे में दूसरे पहलुओं को देखते हुए इस मामले की जांच की जा रही है.

सुप्रीम कोर्ट ने बच्चियों की खतने की प्रथा को असंवैधानिक बताया

सुप्रीम कोर्ट ने दाऊदी बोहरा मुसलमान समुदाय में बच्चियों की खतने की प्रथा पर सवाल उठाया है. दैनिक भास्कर में छपी खबर के मुताबिक शीर्ष अदालत ने इसे असंवैधानिक बताया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘महिलाओं का खतना केवल इसलिए नहीं कर सकते हैं कि उन्हें शादी करनी है. उनका जीवन केवल शादी और पति के लिए नहीं होता. उच्चतम अदालत ने यह टिप्पणी महिलाओं के खतने पर पूर्ण पाबंदी की मांग करने वाली एक याचिका पर सुनवाई के दौरान की. मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने कहा, ‘जब हम महिला अधिकारों को बढ़ावा देने को लेकर मुखर हैं तो इन्हें उलट दिशा में कैसे जाने दे सकते हैं?’ सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए संविधान के अनुच्छेद- 15 और 21 का हवाला भी दिया. इनमें नागरिकों को धर्म, जाति, नस्ल और लिंग के आधार पर भेदभाव से सुरक्षा और जीवन की सुरक्षा का मूल अधिकार दिया गया है.

अपनी सरकार की वादाखिलाफी का हिसाब देने से प्रधानमंत्री बच नहीं सकते : कांग्रेस

विपक्ष की ओर से कारोबारियों को चोर-लुटेरा बताने के प्रधानमंत्री के बयान को कांग्रेस ने गलत बताया है. साथ ही, उन्होंने इस पर सख्त आपत्ति भी जाहिर की है. दैनिक जागरण में प्रकाशित खबर के मुताबिक कांग्रेस प्रवक्ता आनंद शर्मा ने कहा, ‘विपक्ष को कोसने और अपनी गरीबी का रोना रोकर चार साल की अपनी सरकार की वादाखिलाफी का हिसाब देने से प्रधानमंत्री बच नहीं सकते.’ उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री ने उद्योगपतियों को यह संदेश देने की कोशिश की कि कांग्रेस उन्हें चोर-लुटेरा बता रही है. आनंद शर्मा ने इस पर कहा, ‘सच्चाई यह है कि उद्योग जगत की हस्तियों को कांग्रेस देश के आर्थिक विकास में भागीदार मानती है. कांग्रेस ने सवाल उद्योग जगत के नेताओं पर नहीं बल्कि, सत्ता के जरिये अनुचित फायदा लेने वालों पर उठाया है.’

पर्याप्त दस्तावेज न मिलने से मणिपुर फर्जी मुठभेड़ों और अतिरिक्त न्यायिक हत्याओं की जांच में देरी : सीबीआई

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने मणिपुर फर्जी मुठभेड़ों और अतिरिक्त न्यायिक हत्याओं की जांच को लेकर हो रही देरी की वजह दस्तावेजों का न मिलना बताया है. द टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक जांच एजेंसी के वकील अभिषेक दयाल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 41 मामलों की जांच की जा रही है. उन्होंने कहा कि सीबीआई को पुलिस, सेना और अर्द्धसैनिक बलों से इससे जुड़े पूरे दस्तावेज अभी भी हासिल नहीं हुए हैं. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी कि सीबीआई ने अब तक 27 मामले दर्ज कर लिए हैं. साथ ही, दो आरोपपत्र भी दायर किए गए हैं.

ई-कॉमर्स कंपनियों द्वारा अपने उपभोक्ताओं का डेटा भारत में ही रखने की सिफारिश

आने वाले दिनों में एमेजॉन और फ्लिपकार्ट जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों को अपने उपभोक्ताओं का डेटा भारत में ही रखना पड़ सकता है. साथ ही, इन्हें इससे जुड़े राष्ट्रीय नियामक के पास अपना पंजीकरण भी कराना होगा. बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक ई-कॉमर्स पर गठित राष्ट्रीय कार्यबल ने अपने मसौदे में सरकार को ये सुझाव दिए हैं. बताया जाता है कि अब ई-कॉमर्स के लिए नीति बनाने से पहले इन सुझावों पर विचार किया जाएगा. इस नीति में ई-कॉमर्स कारोबार और उपभोक्ताओं से जुड़े सभी पहलुओं को शामिल किए जाने की संभावना है. उधर, डेटा सुरक्षा पर न्यायाधीश श्रीकृष्ण समिति भी भारतीय ग्राहकों की व्यक्तिगत जानकारियों को देश में ही मौजूद सर्वर में रखने पर जोर दिया है.