देश के करीब आधे जिलों में भूजल खराब हो गया है. इसकी वजह फैक्ट्रियों से निकलने वाले कचरे और कचराभराव स्थलों के साथ लंबे समय तक कीटनाशकों और रासायनिक खाद का इस्तेमाल भी है. टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक सरकार ने संसद में बताया कि इन जिलों के भूजल में नाइट्रेट की मात्रा तय सीमा से ज्यादा बढ़ गई है. इसके अलावा पानी में मौजूद फ्लोराइड, आयरन, आर्सेनिक और अन्य धातुओं की मात्रा भी चिंताजनक स्तर पर पहुंच गई है. सरकार के मुताबिक देश में कई जगहों का पानी इन जहरीले पदार्थों की मौजूदगी की वजह से ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स द्वारा तय की गई सीमा से ज्यादा प्रभावित है.

साल में एक बार भूजल की रासायनिक गुणवत्ता की जांच की जाती है. केंद्रीय भूजल बोर्ड देश भर में फैले अपने 15,000 स्रोतों के जरिए यह जानकारी इकट्ठा करता है. बोर्ड की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल के एक या उससे ज्यादा जिलों के भूजल में सभी जहरीले पदार्थ शामिल हैं. रिपोर्ट में बताया गया है कि दिल्ली के 11 जिलों के भूजल में फ्लोराइड, नाइट्रेट, आर्सेनिक और लेड अतिरिक्त मात्रा में पाए गए हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक पानी में नाइट्रेट की मात्रा ज्यादा होने से खून के जरिए शरीर में ऑक्सीजन पहुंचने की क्षमता में कमी हो सकती है. ज्यादा लंबे वक्त तक आर्सेनिक वाला पानी पीने से त्वचा और मूत्राशय का कैंसर हो सकता है. साथ ही, गुर्दे, फेफड़े और पैरों की रक्त धमनियों से संबंधित बीमारियां भी हो सकती हैं. इसके अलावा डायबिटीज, उच्च रक्त चाप (हाई ब्लड प्रेशर) और प्रजनन संबंधी विकार हो सकते हैं. अन्य पदार्थों की अतिरिक्त मात्रा भी कई तरह की बीमारियों का कारण बन सकती है.