केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को एससी-एसटी एक्ट के मूल प्रावधानों को बहाल करने के लिए संसद में विधेयक पेश करने पर सहमति व्यक्त की है. एएनआई ने एक उच्च अधिकारी के हवाले से बताया कि सरकार यह विधेयक इसी सत्र में पेश करेगी. बीते मार्च में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया था कि एससी-एक्ट के तहत किसी को फौरन गिरफ्तार नहीं किया जा सकता. अदालत का कहना था कि इसके लिए पहले जांच जरूरी होगी.

कई दलित संगठनों ने इस फैसले का विरोध किया था. उनका कहना था कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से एससी-एसटी एक्ट कमजोर हुआ है. उन्होंने सरकार से इसे इसके मूल स्वरूप में बहाल करने की मांग भी की थी. इसके बाद मोदी सरकार की सहयोगी और रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी ने भी इस मांग का समर्थन किया था. बीती 27 अप्रैल को उसने कहा था कि यदि सरकार इस संबंध में विधेयक नहीं लाती तो वह नौ अगस्त को दलित संगठनों द्वारा बुलाए गए बंद का समर्थन करेगी.

इससे पहले रामविलास पासवान और एनडीए सरकार की एक और सहयोगी रिपब्लिक पार्टी आफ इंडिया के नेता रामदास अठावले जस्टिस एके गोयल की एनजीटी में नियुक्ति को लेकर भी विरोध जता चुके हैं. जस्टिस गोयल उस खंडपीठ का हिस्सा थे जिसने एससीएसटी एक्ट के प्रावधानों को सीमित करने का फैसला सुनाया था.