रिजर्व बैंक आॅफ इंडिया (आरबीआई) ने रेपो रेट में 0.25 फीसदी की वृद्धि कर दी है जिसके बाद यह नीतिगत दर बढ़कर 6.50 पर पहुंच गई है. आरबीआई के गवर्नर उर्जित पटेल की अध्यक्षता में बुधवार को मौद्रिक नीति समिति के सदस्यों की हुई बैठक में यह फैसला किया गया. इससे पहले इसी साल जून में भी आरबीआई ने रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि की थी. तीन महीनों के भीतर रेपो रेट में दोबारा वृद्धि किए जाने से घर और कार आदि के लिए लोन महंगा होने की संभावना जताई जा रही है.

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से बीते दो महीनों में थोक और खुदरा महंगाई दर में इजाफा हुआ है. इसके अलावा रुपया भी डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर पड़ रहा है. माना जा रहा है कि ऐसे में महंगाई को थामने के लिए आरबीआई ने रेपो रेट बढ़ाने का फैसला किया है. इससे पहले जून के महीने में हुई मौद्रिक नीति की समीक्षा के दौरान भी आरबीआई ने कहा था कि अगर आने वाले दिनों में महंगाई दर नहीं थमती तो नीतिगत दरों में और बदलाव देखने को मिल सकता है.

देश के निजी और सरकारी बैंक अपने रोजमर्रा के कारोबार और वित्तीय लेनदेन को निपटाने के लिए आरबीआई से जिस दर पर पैसा हासिल करते हैं उसे रेपो रेट कहा जाता है. रिवर्स रेपो रेट वह दर होती है जिसे बैंकों द्वारा आरबीआई के पास जमा कराने पर उन्हें दैनिक रूप से ब्याज मिलता है. आरबीआई की तीसरी नीतिगत दर कैश रिजर्व रेशियो कहलाती है. इसके तहत बैंकों को आरबीआई के पास एक निश्चित रकम जमा करके रखनी होती है.