सुप्रीम कोर्ट आरक्षण के संबंध में अपने 12 पुराने एक फैसले का पुनरीक्षण करने वाला है. यह फैसला 2006 में आया था. इस पर सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की संविधान बेंच आगामी तीन अगस्त से पुनर्विचार शुरू कर सकती है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने 12 साल पहले व्यवस्था दी थी कि सरकारी नौकरियों और पदोन्नति आदि में क्रीमीलेयर (किसी समाज का संपन्न तबका) को आरक्षण से दूर रखने का मसला एससी-एसटी पर लागू नहीं होता. लेकिन अब इसका पुनरीक्षण हो रहा है. अदालत यह भी विचार करेगी कि इस पुनरीक्षण के लिए कहीं सात जजों की बेंच गठित करने की ज़रूरत तो नहीं है. फिलहाल मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच जजों की बेंच इसका परीक्षण करेगी.

बेंच जस्टिस कुरियन जोसेफ, आरएफ नरीमन, संजय किशन कौल और इंदु मल्होत्रा शामिल हैं. वैसे शीर्ष अदालत से केंद्र सरकार ने ही मांग की है कि इस मसले का सात जजों की बेंच से परीक्षण कराया जाए. साथ ही जितना जल्द हो सके इसका निपटारा किया जाए. सरकार ने दलील दी है कि क्रीमीलेयर के बाबत अदालत के कई फैसले हैं जो रेलवे और अन्य सरकारी सेवाओं में लाखों नियुक्तियों की राह में बाधा बन रहे हैं. इन फैसलों की वज़ह से भ्रम की स्थिति बनी रहती है. इसे दूर किया जाना चाहिए.