पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार और केंद्र के बीच तनाव बढ़ने का एक और कारण तैयार होता दिख रहा है. ख़बरों के मुताबिक 17 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिदनापुर रैली में हुए हादसे की जांच रिपोर्ट तैयार हो गई है. इसमें हादसे के लिए पश्चिम बंगाल पुलिस की लापरवाही को भी ज़िम्मेदार बताया गया है.

केंद्रीय गृह सचिव राजीव गॉबा ने एनडीटीवी से इस बात की पुष्टि की है कि केंद्र सरकार की जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है. कैबिनेट सचिवालय में सुरक्षा सचिव एसके सिन्हा की अध्यक्षता में जांच टीम गठित की गई थी. सूत्रों ने बताया है कि इस रिपोर्ट में साफ तौर पश्चिम बंगाल सरकार और पुलिस के इंतज़ामों पर उंगली उठाई गई है. इसमें कहा गया है कि रैली के इंतज़ाम के मामले में राज्य सरकार का रवैया शुरू से ही असहयोगी रहा. प्रशासन ने रैली के लिए पांडाल लगाने वालों को ठेका देने में लापरवाही बरती. यहां तक कि रैली स्थल पर वरिष्ठ पुलिस अफसर भी मौज़ूद नहीं थे. जिन पुलिस अफसरों को सुरक्षा इंतज़ाम देखने थे वे भी मौके से गायब थे.

रिपोर्ट के मुताबिक वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की अनुपस्थिति में छोटे अधिकारी और जवान ठीक तरह से हालात संभाल नहीं पाए. आयोजन स्थल पर महज़ 70,000 लोग ही आ सकते थे. लेकिन वहां एक लाख लोग इकट्‌ठा हो गए. इस भीड़ को मौके पर तैनात पुलिस का अमला संभाल नहीं पाया. इसका नतीज़ा ये हुआ कि एक जगह से पांडाल भरभरा कर गिर गया और उसकी चपेट में आने से 90 से ज़्यादा लोग घायल हो गए. रिपोर्ट की मानें तो इस हादसे के वक़्त राज्य प्रशासन के अधिकारी भी मौके से नदारद थे.