राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने बुधवार को एक बार फिर कहा है कि दिल्ली-एनसीआर में डीजल से चलने वाली 10 साल पुरानी गाड़ियों की कोई जगह नहीं है. द टाइम्स आॅफ इंडिया के मुताबिक एनजीटी के अध्यक्ष जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता में बैठी एक पीठ ने वायु प्रदूषण से संबंधित चार साल पुराने एक मामले की सुनवाई पूरी करते हुए यह दिशा-निर्देश जारी किए है.

एनजीटी के इस आदेश में यह भी कहा गया है कि ऐसे डीजल वाहन जो बीएस-4 मानकों के अनुरूप नहीं हैं और जिनका उपयोग एम्बुलेंस, पेट्रोलिंग, खाद्य पदार्थों की आपूर्ति, अग्नि शमन और साफ-सफाई के कार्यों के अलावा किसी दूसरे प्रयोजन के लिए किया जा रहा है तो उनका पंजीकरण नहीं होना चाहिए. इसके साथ ही 11 दिसंबर 2015 को दिए गए अपने ही एक आदेश का हवाला देते हुए उसने यह भी कहा कि बीएस-4 मानकों पर न बने 10 साल पुराने डीजल वाहनों को दिल्ली-एनसीआर की सड़कों पर चलने देने के लिए पहले भी इजाजत मांगी गई थी और तब भी इसे अस्वीकार कर दिया गया था.

इससे पहले दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण के मद्देनजर दिसंबर 2015 के उस आदेश में एनजीटी ने 10 साल पुराने ऐसे डीजल वाहनों के चलने पर रोक लगाने का फैसला सुनाया था जो बीएस-4 मानकों के अनुरूप नहीं थे. इसके साथ ही हरित अधिकरण ने सड़क परिवहन कार्यालय (आरटीओ) को ऐसे वाहनों का पंजीकरण रद्द करने का आदेश भी दिया था. तब सरकार ने एनजीटी के इस आदेश को मोटर वाहन अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन बताते हुए इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.