भारत में ज्यादातर लोगों को अगले एक साल में अपनी आय, सामान्य आर्थिक स्थिति और रोजगार की संभावनाओं में सुधार की उम्मीद नहीं है. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के उपभोक्ता आत्मविश्वास सर्वेक्षण के दौरान यह बात निकल कर आई है. सरकार भले ही अर्थव्यवस्था के लगातार बेहतर होने के दावे कर रही हो लेकिन आम लोग इससे सहमत नहीं दिखते. अगले लोक सभा चुनाव में अब एक साल से भी कम समय बचा है और ऐसे में यह सर्वे सरकार के लिए चिंता बढ़ाने वाला लगता है.

लाइवमिंट की खबर के मुताबिक इस सर्वे में जिन लोगों को शामिल किया गया, उनमें से केवल 48.2 प्रतिशत को लगता है कि अगले 12 महीनों के दौरान देश की अर्थव्यवस्था में सुधार देखने को मिलेगा. वहीं, 27.7 प्रतिशत लोग मानते हैं कि हालात और खराब होंगे. इसके अलावा 34.6 प्रतिशत लोगों ने माना कि पिछले साल इसमें सुधार हुआ था, जबकि 42 प्रतिशत ने कहा कि अर्थव्यवस्था की सामान्य स्थिति बीते एक साल में खराब हुई है.

आय में बढ़ोतरी के मामले में 49.8 प्रतिशत लोगों ने उम्मीद जताई कि अगले एक साल के दौरान उनकी आय में वृद्धि होगी. सर्वे में शामिल 25.3 प्रतिशत लोगों ने बताया कि पिछले साल उनकी आय में बढ़ोतरी हुई थी. वहीं, 49.1 प्रतिशत लोगों का कहना था कि एक साल में रोजगार की संभावनाओं में सुधार होगा. जबकि करीब एक चौथाई लोगों ने कहा कि रोजगार के मामले में हालात और खराब होंगे. इसके अलावा 33.5 प्रतिशत लोगों का कहना था कि पिछले साल उन्हें रोजगार की संभावनाओं में सुधार देखने को मिला, जबकि 40 प्रतिशत ने कहा कि उनके रोजगार की स्थिति और खराब हुई.

यह सर्वे देश के छह बड़े महानगरों - बेंगलुरु, चेन्नई, कोलकाता, हैदराबाद, मुंबई और नई दिल्ली - में किया गया था. सर्वे के आंकड़े इन्हीं शहरों की हालत दर्शाते हैं. चूंकि बीते तीन सालों में कृषि क्षेत्र और छोटे-मोटे कारोबारियों की हालत खराब हुई है, ऐसे में इस बात की ज्यादा संभावना है कि ग्रामीण इलाकों में रोजी-रोजगार और कारोबार को लेकर लोगों की ज्यादा नकारात्मक राय सामने आए.