भारत और इंग्लैंड के बीच खेले जा रहे टेस्ट मैच के पहले दिन विराट कोहली ने इंग्लैंड के कप्तान जो रूट को सीधे थ्रो पर रन अाउट किया और कुछ अलग तरीके से जश्न मनाया. यह था उनका ‘माइक ड्रॉप सेलिब्रेशन’. दरअसल, विराट ने हाथ से माइक गिरने वाली रूट की उस भंगिमा की नकल की थी जो इंग्लिश कप्तान ने भारत के खिलाफ हालिया वनडे सीरीज में शतक बनाने के बाद बनाई थी. इस पर खूब शोर हुआ. चर्चा यहां तक अा पहुंची कि इसके लिए विराट पर मैच रेफरी फाइन लगाएंगे.

खैर, ऐसा कुछ हुआ नहीं. लेकिन यह सवाल जरूर लोगों के दिमाग में जरूर आया कि विराट कहीं खेल से ज्यादा भाव-भंगिमा की उस लड़ाई में तो नहीं उलझ रहे हैं जिसमें इंग्लैंड और अास्ट्रेलिया के क्रिकेटर माहिर माने जाते हैं. 2014 के दौरान इंग्लैंड में विराट के बुरी तरह असफल रहने की खबरें एजबेस्टन टेस्ट से पहले स्थानीय मीडिया में लगातार छप ही रहीं थीं.

लेकिन टेस्ट के दूसरे दिन गुरुवार को विराट हर किस्म की धैर्य परीक्षा पास करने के इरादे से आए थे. 100 रन पर भारत के पांच विकेट गिरने के बाद भारत की हालत डांवाडोल हो चुकी थी. लग रहा था टेस्ट एकतरफा तरीके से इंग्लैंड के पक्ष में झुक रहा है. लेकिन तभी विराट 225 गेंदों पर 149 रनों की पारी खेलकर टीम को संकट से उबार ले गए. इसे उनके करियर की सबसे बेहतरीन टेस्ट पारी माना जा रहा है. 182 पर आठ विकेट खो चुके भारत को उन्होंने 274 रन तक पहुुंचा दिया और इंग्लैंड को पहली पारी में सिर्फ 13 रन की बढ़त लेने दी. मशहूर क्रिकेट कमेंटेटर हर्षा भोगले ने इस पारी के बारे में कहा कि इसे देखना ही अपने आप में विशिष्ट है.

भारतीय कप्तान की यह विशिष्ट पारी आसान नहींं थी. इंग्लैंड की पहली पारी के 287 रनों के जवाब में बल्लेबजी करने उतरी भारतीय टीम की शुरुअात कामचलाऊ ही रही. एंडरसन और स्टुअर्ट ब्राड की लहराती तेज गेंदों के सामने मुरली विजय और शिखर ने एक घंटे से ज्यादा का वक्त गुजारा और बिना कोई विकेट खोये भारत का स्कोर 50 रन पहुंचाया. लेकिन अपना दूसरा ही टेस्ट मैच खेल रहे सैम करन के एक छोर से बॉलिंग संभालने के बाद तस्वीर बदली. 14 वें अोवर में मुरली विजय (20) डीआरएस से लिए गए फैसले में पगबाधा अाउट करार दिए गए. तीन गेंद बाद ही केएल राहुल (04) को सैम करन ने बोल्ड कर दिया. करन का कहर यहीं नहीं थमा. अगले ही ओवर में उन्होंने शिखर धवन (26) को स्लिप में कैच करा दिया. 50 रनों पर भारत बिना कोई विकेट गंवाए खेल रहा था और दो अोवर बाद ही उसका स्कोर 59 पर तीन हो चुका था.

जिमी एंडरसन बनाम विराट कोहली

विराट कोहली क्रीज पर थे. सैम करन तीन विकेट ले चुके थे. लेकिन शायद विराट के दिमाग में करन, स्टुअर्ट ब्राड और बेन स्टोक्स से ज्यादा एंडरसन थे. इसकी वजह भी थी. एंडरसन वह गेंदबाज हैं जो टेस्ट मैचों में विराट को सबसे ज्यादा बार अाउट कर चुके हैं. 2014 में इंग्लैंड में हुए पांच टेस्टों में एंडरसन ने ही चार बार विराट को पैवेलियन भेजा था. दुनिया के बेहतरीन बल्लेबाज और गेंदबाज के बीच मुकाबला था. 2014 की इंग्लैंड सीरीज में कोहली एंडरसन के सामने किस तरह से बीट हुए थे, उसके पुराने वीडियो दिखाकर मीडिया कोहली का मजाक उड़ा रहा था. इंग्लिश अखबार भी पिछले दौरे में विराट के प्रदर्शन की बात कर रहे थे.

लेकिन विराट कोहली ने भी शायद अपना मजाक उड़ाने वाले वे वीडियो देखे थे और उनसे खासा सबक भी लिया था. एंडरसन के खिलाफ उन्होंने गार्ड अपने हमेशा के स्टाइल से थोड़ा अलग लिया. उनका स्टांस क्रीज में थोड़ा आगे बढ़कर था. इसके पीछे विराट की रणनीति शायद यह थी कि हवा में नाचती एंडरसन की गेंद को पहले ही बल्ले पर ले उसकी स्विंग खत्म की जाए. इससे मजबूर होकर एंडरसन गेंद की लेंथ को घटाएंगे और उन्हें खेलने के लिए रूम मिलेगा.

लेकिन रणनीति तो एंडरसन के पास भी थी. खतरनाक इनस्विंगर. भारतीय कप्तान ने खाता भी नहींं खोला था और विराट कोहली को यह एंडरसन की तीसरी ही गेंद थी. उन्होंने थोड़ा अनमने ढंग से हल्के हाथ से शॉट खेला और गेंद बल्ले का बाहरी किनारा ले गली में उछल गई. हालांकि कैच बहुत कठिन था, लेकिन बटलर उस कैच को पकड़ लेते तो एंडरसन और कोहली केे बीच खेला जा रहा मानसिक खेल फिर एंडरसन की विजय के साथ खत्म हो जाता. एंडरसन की कुछ और गेंदों पर भी कोहली के बल्ले का बाहरी किनारा लगा. लेकिन कल विराट कोहली का दिन था.

एंडरसन बिना डिगे अॉफ स्टंप पर सनसनाती और घूमती गेंदों वाली गेंदबाजी कर रहे थे. फिर कोहली ने क्रिकेट की उस सूक्ति का सहारा लिया जिसमें कहा गया है कि जब कोई बॉलर बहुत अच्छी गेंदबाजी कर रहा हो तो उसे न खेलना ही सबसे अच्छा शॉट होता है. कोहली एंडरसन की गेंदों को बहुत सफाई से छोड़ रहे थे. मौका पड़ने पर वे स्ट्राइक बदल लेते. विराट कोहली की बल्लेबाजी देखकर उन सचिन की याद आ रही थी जो ग्लेन मैकग्रा की सनसनाती गेंदों वाले स्पेल में नौ अोवर मेडन खेल गए थे और फिर जब गेंदबाजों का हौसला टूटा तो उन्होंने स्ट्रोक खेलना शुरु किया और शानदार शतक जड़ा.

विराट कोहली एंडरसन के साथ अपने अहं के टकराव को भूल चूके थे. अब गेंदबाज का मान-मर्दन करने के बजाय उनका ध्यान टीम के स्कोर पर लग चुका था. एंडरसन से बदला लेने के बजाय वे उनकी गेंदों को छोड़ते रहे. यह उनके उस व्यवहार से बिल्कुल अलग था जिसमें उन्होंने जो रूट को आउट करने के बाद उनको चिढ़ाने की कोशिश की थी.

इधर, विराट एंडरसन के साथ मानसिक लड़ाई लड़ रहे थे. उधर, बेन स्टोक्स ने भारतीय मध्यम क्रम को भी पैवेलियन भेज दिया. तकनीकी रूप से दक्ष रहाणे (15) ने स्टोक्स के ओवर में चौका लगा कर भारत को 100 रन पर पहुंचाया. लेकिन अगली ही गेंद पर वे कैच थमा बैठे. अगले अोवर में दिनेश कार्तिक बिना खाता खोले बेन स्टोक्स की गेंद पर बोल्ड हो गए. भारत का स्कोर 100 पर पांच हो गया. और मैच का पलड़ा इंग्लैंड की ओर झुक गया.

विराट कोहली एंडरसन के साथ अपने संघर्ष में व्यस्त थे. उन्हें दूसरे छोर पर मदद चाहिए थी. लेकिन, उधर तो विकेटों की पतझड़ लगी थी. इसका फायदा एंडरसन को मिला और पिछले आठ ओवरों से बेहतरीन गेंदबाजी के सामने विराट कोहली ने जो धैर्य कायम कर रखा था वह टूटा और गेंद बल्ले का किनारा लेकर सेकेंड स्लिप में खड़े मलान की और गई. स्लिप फील्डर के लिए यह बहुत आसान कैच था, लेकिन मलान उसे पकड़ नहीं पाए. भाग्य की देवी विराट के साथ थी और उसने उनकी एक ऐतिहासिक पारी की भूमिका तय कर दी.

मलान ने जिस समय कैच छोड़ा वे 21 पर थे. और जब इंग्लिश कप्तान जो रूट ने एंडरसन को बॉलिंग से हटाया तो विराट कोहली को अपने धैर्य और संयम का पहला पुरस्कार मिला. फिर जब बेन स्टोक्स की गेंद पर एलिस्टर कुक ने हार्दिक पंड्या का पहली स्लिप में अासान कैच छोड़ा तो विराट की राह और अासान हो गई. हार्दिक पंड्या जब अाउट हुुए तब तक विराट उनके साथ 48 रन की साझेदारी कर चुके थे और भारत का स्कोर 148 रन हो चुका था.

एंडरसन बाद में दूसरे स्पेल में आए, लेकिन विराट कोहली ने उनके खिलाफ मानसिक दृढ्‍ता नहीं छोड़ी. उनका क्रिकेटिंग सेंस चरम पर था. एंडरसन ने पूरे मैच में सबसे ज्यादा 22 ओवर फेंके और उनमें से आधे से ज्यादा ओवर उन्होंने विराट कोहली को खिलाए. लेकिन कोहली की मानसिक दृढ़ता देखिए, उन्होंने एंडरसन के खिलाफ 74 गेंदें खेलीं और उन पर सिर्फ 18 रन बनाए. बाकी गेंदबाजों की उन्होंने 151 गेंदें खेलीं और उन पर 131 रन ठोक दिए जिनमें 22 चौके और एक छक्का शामिल है.

विपक्षी कप्तान की भूल और पुछल्लों के साथ ने कमाल कर दिया

एंंडरसन के स्पेल विराट को तो आउट नहीं कर पाए, लेकिन अपनी मेहनत का नतीजा तब उन्हें मिला जब उन्होंने आर अश्विन (10) और मोहम्मद शमी (02) को आउट कर भारत का स्कोर 182 पर आठ कर दिया. इतने लंबे संघर्ष के बाद इंग्लैंड के कप्तान जो रूट ने शायद मान लिया था कि अब विराट कोहली आउट नहीं होंगे और उन्होंने बाकी बचे तीन पुछल्ले बल्लेबाजों यानी टेलएंडर्स को आउट करने की रणनीति पर काम शुरु कर दिया.

लेकिन विराट के दिमाग में कुछ और था. उन्होंने इन पुछल्ले बल्लेबाजों को खेलने का मौका ही नहींं दिया. आखिरी तीन बल्लेबाजोंं के साथ साझेदारियों में उन्होंने कुल 106 गेंदें खुद खेलीं और महज 37 बाकियों को खेलने दीं. मतलब तीनों से तीन गुना ज्यादा गेंदें. ओवर की आखिरी गेंदों पर रन लेकर विराट कोहली ने ज्यादातर मौकों पर स्ट्राइक अपने हाथ में रखी. इंग्लैंड के कप्तान के फील्डिंग लगाने के तरीके ने भारतीय कप्तान का काम और आसान कर दिया. रूट ने सोचा था कि विराट अब शायद बड़े शॉट लगाकर तेजी से रन बनाने का प्रयास करेंगे क्योंकि टेलएंडर्स कब आउट हो जाएं क्या भरोसा. यही सोच उन्होंने फील्डिंग को खोल दिया और टेस्ट मैच के अाक्रामक क्षेत्ररक्षण के बजाय फील्डरों को बैट्समैन से दूर कर सुरक्षात्मक रूख अपनाया. विराट ने इसका इस्तेमाल स्ट्राइक बदलने मेें किया और मौका मिलने पर अाक्रमण किया. आखिरी के दो विकेटों के लिए भारत ने 92 रन जोड़े. जिसमें इशांत शर्मा के पांच और उमेश यादव का सिर्फ एक रन था, बाकी के 86 रन विराट ने जोड़े थे.

सुनील गावस्कर और अाशीष नेहरा ने रूट की कप्तानी की अालोचना करते हुए कहा कि इंग्लैंड के कप्तान टेलएंडर्स को अाउट करने के साथ विराट कोहली को आउट करने पर भी पूरा ध्यान लगाते और सुरक्षात्मक फील्डिंग के बजाय आक्रामक क्षेत्ररक्षण लगाते तो वे भारत को कम से कम 50 रन पहले रोक सकते थे.

लेकिन जो होना था, वह हो चुका था. विराट जैसे स्ट्रोकमेकर खिलाड़ी ने अच्छी बॉलिंग पर धैर्य दिखाया और फिर स्ट्राइक बदल टेलएंडर्स को इंग्लिश घातक गेंदबााजी से बचाया. 149 रनों की इस बेमिसाल पारी ने साबित कर दिया कि वे केवल व्यक्तिगत प्रतिभा वाले महान बल्लेबाज ही नहींं हैं, बल्कि उनमें बेहतर नेतृत्व क्षमता और अद्भुत क्रिकेटिंग सेंस भी भरपूर है.

एंडरसन के साथ मानसिक लड़ाई में विराट कोहली जीते और फिर बतौर कप्तान भी जो रूट पर भारी पड़े. रूट के गलत फैसलोंं ने भी उनकी इस एेतिहासिक पारी में खासी मदद की. इसके लिए उन्हें रूट का मन ही मन धन्यवाद करना चाहिए जिनकी नकल उतार कर विराट ने उन्हें चिढ़ाने की कोशिश की थी. नकल उतार कर चिढ़ाने के बजाय विराट की कप्तानी पारी रूट को बेहतर जवाब है.