इमरान जी, आपने नया पाकिस्तान के नारे और वादे के साथ चुनाव लड़ा था. इसका क्या मतलब है?

वही जो आपके मुल्क में ‘अच्छे दिनों’ का मतलब है!

पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बनने के बाद आपकी पहली प्राथमिकता क्या होगी?

अपने चौथे निकाह के लिए खबातीन ढूंढ़ना!...अब्ब्ब मेरे कहने का मतलब है कि नए पाकिस्तान का निर्माण करना.

पाकिस्तान को बदलने की प्रेरणा आपको कहां से मिली?

बीवियां बदलने से!...हालांकि पाकिस्तान बदलना बीवियां बदलने जितना आसान नहीं. फिर भी मेरे हौसले बुलंद हैं.

इमरान जी, आपने ऐसा क्यों कहा कि प्रधानमंत्री बनने के बाद आप सरकारी बंगला नहीं लेंगे?

अरे भई, केजरीवाल स्पेशल एंटरटेनमेंट पर सारा हक सिर्फ दिल्ली की जनता का ही नहीं है, थोड़ा-बहुत पाकिस्तान वालों का भी है! मेरे कहने का मतलब है कि अपने भाषणों में मैंने अरविन्द केजरीवाल का नाम भले न लिया हो पर उनकी ईमानदारी से मैं हमेशा प्रभावित रहा हूं. वैसे मेरे इस ऐलान से तो आपको खुश होना चाहिए कि पाकिस्तान में भी अब एक केजरीवाल पैदा गया है.

पाकिस्तान के इस चुनाव पर लग रहे धांधली के आरोपों में कितनी सच्चाई है?

उतनी ही जितनी आपके यहां ईवीएम हैकिंग की बात में थी!

अच्छा यह बताइए कि आपकी सरकार में सेना का कितना दखल होगा?

मोहतरमा, असली मसाइल यह है कि सेना के फैसलों में मेरी कितनी दखलंदाजी होगी!

यानी कि आप मान रहे हैं कि आपकी और आपकी गठबंधन सरकार की असली कमान पाकिस्तानी सेना के हाथ में होगी?

यह आरोप सरासर गलत है कि मेरी कमान जनरलों के हाथ में होगी. आखिर जब मैं पूरा का पूरा उनकी जेब में हूं तो फिर कमान का क्या मतलब! वैसे भी जिस आदमी ने अपनी कमान कभी अपनी बीवियों के हाथों में नहीं दी, भला वो ये कमान जनरलों के हाथों में क्यों देगा.

पाकिस्तानी अखबार द डेली टाइम्सके संपादक रजा रुमी का तो कहना है कि पाकिस्तानी सेना संसद पर मजबूत पकड़ चाहती है और वह ऐसी सरकार चाहती है जिसे जब चाहे गिरा सके. इस बारे में आपका क्या कहना है?

एक बात बताइए मोहतरमा, जब आपको अपने मुल्क की इतनी तरह की सेनाओं से कोई दिक्कत नहीं, फिर हमारी सिर्फ एक सेना से इतनी क्या परेशानी है. हमारी तो सेना भी एक है और खुदा भी!

क्या मतलब?

(खीजते हुए) मतलब यही है कि हमारी तो सिर्फ संसद एक सेना के कब्जे में है, पर आपके तो सारे सांसद और जनता कितनी सेनाओं के कब्जे में हैं, यह पता लगाना भी मुश्किल है! कभी आपका मुल्क ‘करणी सेना’ के कब्जे में रहता है तो कभी ‘बजरंगी सेना’ के. और आजकल तो ‘गोसवकों’ की सेना का पूरे देश पर राज है...आप पहले अपने मुल्क को इन सेनाओं से बचाइए तब हमारी सेना के बारे में सवाल कीजिए.

आपने कहा है कि बातचीत के लिए अगर भारत एक कदम बढ़ेगा, तो पाकिस्तान दो कदम आगे बढ़ाएगा. आखिर इस बात से आपका क्या मतलब है?

मेरा मतलब है कि मोदी जी एक फेंकेंगे तो हम दो फेकेंगे!

क्या फेंकेंगे?

आपके वजीर-ए-आजम के पास फेंकने को ‘बात बम’ ज्यादा हैं और हमारे पास असली के बम...जिसके पास जो होगा वो वही तो फेंकेगा!

अच्छा यह बताइए कि आपमें और मोदी जी में क्या समानता है?

सबसे बड़ी समानता तो यही है कि ‘फेंकने में’ हम दोनों का ही कोई सानी नहीं!...पर इस मामले में वे मुझसे एक कदम पीछे ही रह गए क्योंकि वे सिर्फ मुंह से फेंकते हैं और मैं हाथों से भी बहुत अच्छी फेंक चुका हूं. (मुस्कुराते हुए)

आपकी पार्टी ने चुनाव के लिए कई कट्टरपंथी नेताओं से समर्थन मांगा था. क्या इससे भारत और पाकिस्तान के आपसी संबंधों में और तनाव नहीं बढ़ेगा?

आप समझ नहीं रहीं. भारत से संबंध सुधारने के लिए ही तो हमने कट्टरपंथियों को इतनी तवज्जो दी है.

क्या मतलब?

देखिए, एक समझदार और एक कट्टरपंथी में तो दोस्ती की कोई संभावना हो ही नहीं सकती. हां, लेकिन दो कट्टरपंथी एक-दूसरे के करीब आने में बहुत ही कम समय लेंगे. आपके यहां आजकल हिंदू कट्टरपंथियों का बोलबाला है ही, सो हमने भी मुस्लिम कट्टरपंथियों की तरफ हाथ बढ़ा दिया ताकि दोनों मुल्कों के कट्टरपंथी आपस में मिलकर वह कर सकें, जो दोनों मुल्कों के समझदार मिलकर 70 सालों में भी नहीं कर सके!

भारत के साथ शांति स्थापित करने के लिए आप और क्या-क्या करेंगे?

देखिए मोहतरमा, आप भी जानती होंगी कि हर कही हुई बात की नहीं जाती और हर की जाने वाली बात कही नहीं जाती! मैंने वही कहा जो हमेशा से कहा जाता रहा है और आगे भी कहा जाता रहेगा. कहा तो नवाज शरीफ ने भी था कि भारत के साथ संबंध ठीक करेंगे. पर उन्होंने तीन बार वजीर-ए-आजम रहते हुए सिर्फ एक ही चीज ठीक की...अपनी माली हालत!

अच्छा यह बताइए, नरेन्द्र मोदी जी के शासन में भारत और पाकिस्तान के संबंध सुधरने की आपको कितनी संभावना लग रही है?

बहुत ही मामूली!

ऐसा क्यों?

असल में मोदी जी को सिर्फ दूर के मुल्कों से संबंध सुधारना आता है, पड़ोसियों से नहीं. दिल्ली में रहकर भी वे दिल्ली की केजरीवाल सरकार तक से तो अपने संबंध सुधार नहीं सके, फिर पाकिस्तान की बात तो छोड़ ही दीजिए.

अच्छा यह बताइये कि आप अपने यहां के कट्टरपंथियों पर लगाम लगाने के लिए क्या करेंगे?

जब आप अपने यहां कुकुरमुत्तों की तरह पैदा हो रहे कट्टरपंथियों को रोकने के लिए कुछ नहीं कर पा रहे तो भला हम यहां क्या कर लेंगे! मैं तो जन्मा भी इन्हीं के बीच हूं, पला भी इनके ही साथ हूं और आज इस कुर्सी पर भी इन्हीं की बदौलत पहुंचा हूं!

आपको ऐसा नहीं लगता कि कट्टरपंथियों से निपटे बिना पाकिस्तान का सही विकास नहीं हो सकता?

पहले ऐसा लगता था, पर अब नहीं.

ऐसा क्यों?

जब मोदी जी हिंदुस्तान के ऐसे ही लोगों के साथ विकास की बात कर सकते हैं तो हम क्यों नहीं!... और बात तो की ही जा सकती है, विकास चाहे हो या न हो! (मुस्कुराते हुए)