कभी समाजवादी पार्टी के सर्वेसर्वा रहे मुलायम सिंह यादव के बेहद करीबी माने जाने वाले अमर सिंह के बारे में नई चर्चा यह है कि वे केंद्र की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के करीब आने की कोशिश कर रहे हैं. इस चर्चा को तब और जोर मिला जब पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश में एक कार्यक्रम में संबोधन के दौरान अमर सिंह का नाम लिया. अमर सिंह भी उसी कार्यक्रम में मौजूद थे. बाकायदा भगवा कुर्ता पहने.

हाल में मोदी सरकार के खिलाफ लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर बोलते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री के उद्योगपतियों से गहरे संबंध हैं और उद्योगपति जो गड़बड़ियां कर रहे हैं उनमें प्रधानमंत्री भागीदार हैं. नरेंद्र मोदी ने इसी का जवाब उत्तर प्रदेश की राजधानी में निवेशकों के एक कार्यक्रम में दिया. उन्होंने कहा कि वे उद्योगपतियों के साथ संबंध इसलिए रखते हैं ताकि विकास हो सके और वे छिपकर नहीं मिलते. प्रधानमंत्री ने कहा कि जो लोग उन पर आरोप लगा रहे हैं, वे उद्योगपतियों से छुपकर मिलते थे. उनका कहना था, ‘यहां अमर सिंह बैठे हैं, वे सबका राज जानते हैं.’

प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद अमर सिंह ने मीडिया से बातचीत में नरेंद्र मोदी का न सिर्फ पूरा समर्थन किया बल्कि उन्होंने आरोप लगाने वाले राहुल गांधी और कांग्रेस को भी आड़े हाथों लिया. उन्होंने गौतम अडाणी का हवाला देते हुए कहा कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के शरद पवार उनके करीबी मित्रों में हैं. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे और पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और धीरूभाई अंबानी के संबंधों का भी उन्होंने जिक्र किया. इन सब बातों से लोगों को लग रहा है कि अमर सिंह और भाजपा के बीच एक सहमति की कोशिश अब रंग लाने लगी है.

दरअसल, समाजवादी पार्टी में मुलायम सिंह यादव का असर कम होने और अखिलेश यादव का दबदबा बढ़ने के बाद से कभी पार्टी के महासचिव और दूसरे सबसे ताकतवर नेता रहे अमर सिंह हाशिये पर जाने लगे. फिर भी मुलायम सिंह यादव ने जैसे-तैसे उन्हें राज्यसभा पहुंचाया. लेकिन जब मुलायम सिंह यादव से अध्यक्ष पद भी अखिलेश यादव ने ले लिया तो इसके बाद अमर सिंह के लिए सपा में काई गुंजाइश नहीं बची.

इसी पृष्ठभूमि में अमर सिंह खुद को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए हाथ-पांव मार रहे हैं. भाजपा के एक राष्ट्रीय पदाधिकारी इस बारे में कहते हैं, ‘पार्टी के कई नेताओं से अमर सिंह की बातचीत अक्सर होती रहती है. पिछले कुछ समय से यह संपर्क और बढ़ा है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सहयोगी संगठनों के कुछ कार्यक्रमों में भी अमर सिंह दिखते हैं. वे संघ के भी कुछ पदाधिकारियों से पिछले कुछ समय में मिले हैं.’

तो क्या इसका यह मतलब निकाला जाए कि अमर सिंह भाजपा में आने के लिए संघ में सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं? ये पदाधिकारी कहते हैं, ‘इस बारे में कोई भी निर्णय नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के स्तर पर ही होगा. हां, अमर सिंह के मन में हो सकता है यह बात हो कि अगर वे भाजपा में आते हैं तो कम से कम संघ की ओर से विरोध नहीं हो. लेकिन जहां तक मुझे व्यक्तिगत तौर पर लगता है, उन्हें शायद पार्टी में शामिल न किया जाए.’

लेकिन अमर सिंह तो उसी तरह से कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर हमले कर रहे हैं जो भाजपा के अनुकूल है. तो क्या इसका मतलब यह निकाला जाए कि भाजपा उनके साथ कोई आंतरिक सहमति बनाकर उनके जरिए विपक्ष पर हमला कराएगी? इस सवाल पर इस पदाधिकारी का जवाब आता है, ‘राजनीति में ऐसा कई बार होता है. लेकिन अमर सिंह के इक्का-दुक्का बयानों को आधार बनाकर इस बारे में कुछ कहना जल्दबाजी होगी.’

उत्तर प्रदेश भाजपा के एक नेता का मानना है कि अमर सिंह के साथ अगर भाजपा की कोई सहमति बनती है तो यह भाजपा के लिए अच्छा ही होगा. वे कहते हैं, ‘अमर सिंह पार्टी में शामिल हुए बगैर भाजपा को ज्यादा फायदा पहुंचा सकते हैं क्योंकि उनके पास उत्तर प्रदेश की दोनों प्रमुख पार्टियों समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के कई राज हैं. अगर वे अगले लोकसभा चुनावों के पहले उन राजों को खोलना शुरू करें तो इससे न सिर्फ सपा-बसपा की छवि खराब होगी बल्कि भाजपा को भी इसका चुनावी लाभ मिलेगा.’

कुल मिलाकर भाजपा नेताओं की बातों से यह लगता है कि अमर सिंह की भाजपा के करीब आने की कोशिशों के बावजूद उन्हें हाल-फिलहाल पार्टी में शामिल किए जाने की संभावना कम ही है. लेकिन उन्हें पार्टी से बाहर रखते हुए उनका इस्तेमाल करने से भाजपा में कोई परहेज भी नहीं दिखता.