देश में इस समय कांवड़ यात्रा चल रही है. इस दौरान कांवड़ियों के अलग-अलग रूप दिखाई दे रहे हैं. ऐसे ही एक कांवड़िये हैं सुधीर मक्कड़ उर्फ ‘गोल्डन बाबा’. 58 साल के सुधीर मक्कड़ को यह दूसरा नाम सोने के प्रति उनके प्रेम के लिए मिला है. सोमवार को जब उनका काफिला गाजियाबाद पहुंचा तो उन्हें करीब 20 किलो सोने से लदे देखा गया. हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक उनके काफिले में 21 लग्जरी कारें भी शामिल थीं.

सुधीर मक्कड़ कांवड़ यात्रा में भारी-भरकम सोना पहनने के लिए जाने जाते हैं. पिछले साल उन्होंने 14.5 किलो सोना पहना था. इस साल इसमें बढ़ोतरी हुई और वे 20 किलो सोना पहन कर यात्रा कर रहे हैं. वे कहते हैं कि स्वास्थ्य ठीक रहा तो आगे और यात्राओं में भाग लेते रहेंगे. सोने के चेनें पहनने के अलावा गोल्डन बाबा देवी-देवताओं वाले 21 लॉकेट, बाजूबंद और रोलेक्स की घड़ी भी पहनते हैं. इन सभी की कीमत 27 लाख रुपये है. बाबा के पास एक बीएमडब्ल्यू, तीन फॉर्च्यूनर, दो ऑडी और दो इनोवा कारें हैं. उनके काफिले में ये सभी शामिल रहती हैं. कई बार उन्होंने कांवड़ यात्रा के लिए हमर्स, जगुआर और लैंड रोवर्स जैसी बड़ी कारें और एसयूवी किराए पर लिए हैं. बाबा का कहना है, ‘सोने और कारों के लिए मेरा प्यार कभी नहीं मरेगा. जब मैं यह दुनिया छोड़ूंगा तो अपना सारा सोना अपने उत्तराधिकारी को सौंप जाऊंगा.’

यात्रा के दौरान आराम करने के लिए गोल्डन बाबा अन्य कांवड़ियों की तरह किसी पंडाल में नहीं रुके. उन्होंने दिल्ली-मेरठ मार्ग स्थित एक रिजॉर्ट में आराम किया. उन्होंने अपने स्वर्ण-प्रेम के बारे में बात करते हुए कहा, ‘भगवान की कृपा से (मेरे) सोने में बढ़ोतरी हुई है. उनकी इच्छा हुई और मेरा स्वास्थ्य ठीक रहा तो आगे भी यात्राएं करता रहूंगा. मेरे पेट में तीन साल से इंफेक्शन है. इससे कांवड़ यात्रा के दौरान दिक्कत होती है. मैंने मुंबई समेत (देश के) सबसे अच्छे अस्पतालों में इलाज कराया है, लेकिन कोई आराम नहीं मिला.’

गोल्डन बाबा ने बताया कि पिछले साल उन्होंने घोषणा की थी कि यह उनकी आखिरी कांवड़ यात्रा होगी. तब उन्होंने किराए पर कारें लेने, खान-पान वाले पंडालों और उनमें डॉक्टरों और एंबुलेंस की सुविधाओं पर सवा करोड़ रुपये खर्च किए थे. अपनी यात्राओं को याद कर सुधीर बताते हैं, ‘वक्त के साथ मेरी यात्रा का खर्च हर साल बढ़ता गया. लेकिन मुझे अपनी पहली यात्रा अभी भी याद है जिसमें मात्र 250 रुपये खर्च हुए थे.’