राज्य सभा के उपसभापति को चुनने के लिए चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर दी गई है. इसके लिए बुधवार, आठ अगस्त की दोपहर तक नामांकन दाख़िल किए जाएंगे. चुनाव गुरुवार, नौ अगस्त को सुबह 11 बजे होगा. नतीज़ा भी उसी दिन घोषित होगा.

राज्य सभा के उपसभापति के चुनाव में सिर्फ उच्च सदन के सदस्य ही हिस्सा लेते हैं. सदन में फिलहाल 244 सदस्य हैं. इसमें जीत के लिए 123 मतों की ज़रूरत होगी. पलड़ा विपक्ष का भारी नजर आता है जिसके पास 116 सदस्य बताए जाते हैं. हालांकि अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (13), बीजू जनता दल (9), तेलंगाना राष्ट्र समिति (6) और वाईएसआर कांग्रेस (2) के बारे में अनुमान लगाया जा रहा है कि ये भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले सत्ताधारी एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) का समर्थन कर सकते हैं. इन दलों के 30 सांसदों के समर्थन के बाद एनडीए का आंकड़ा 126 तक पहुंच सकता है, जिसके पार 96 सदस्यों का समर्थन अपने बल पर पहले ही है.

वैसे इस बीच एनडीए के घटक दल शिरोमणि अकाली दल-बादल और शिवसेना के बारे में दावे के साथ कुछ कहा नहीं जा रहा है. शिवसेना इससे पहले लोक सभा में सरकार के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव के मौके पर भी झटका दे चुकी है. सदन में उसके तीन सदस्य हैं. वह भाजपा केंद्र और महाराष्ट्र की सरकार में शामिल होने के बावज़ूद उससे अपनी खुली नाराज़गी जाहिर करती रहती है. जबकि शिराेमणि अकाली दल-बादल की नाराज़गी की ख़बरें इसलिए आ रही हैं क्योंकि एनडीए ने उपसभापति पद के लिए जेडीयू (जनता दल-एकीकृत) के सदस्य हरिवंश को अपना उम्मीदवार बनाने की तैयारी की है, इस तरह की ख़बरें हैं. सदन में अकाली दल के भी तीन सदस्य हैं.

यानी अकाली दल और शिवसेना अगर एनडीए प्रत्याशी के विरोध में मतदान करते हैं तो स्वाभाविक तौर पर विपक्ष की जीत होगी. उसकी ओर से जाने-माने वकील केटीएस तुलसी का नाम सबसे आगे चल रहा है. लेकिन अगर शिवसेना और अकाली दल मतदान में भाग न लेने का फैसला करते हैं तथा बाकी गुणा-भाग भी जस का तस बना रहता है तो एक बार फिर जीत की संभावना एनडीए प्रत्यशी की बन सकती है. क्योंकि उस सूरत में सदन का संख्या बल और कम हो जाएगा और जीतने के लिए ज़रूरी आंकड़ा भी. इस तरह कुल मिलाकर उपसभापति के चुनाव में इस बार मुकाबला काफी दिलचस्प होने की संभावना है और उतना ही उसका नतीज़ा भी.