जजों की वरिष्ठता को लेकर चल रहे हालिया विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को तीन जजों- जस्टिस इंदिरा बनर्जी, जस्टिस विनीत सरन और जस्टिस केएम जोसेफ ने शपथ ले ली है. शपथ लेने और नियुक्ति के तय वरिष्ठताक्रम को देखा जाए तो जस्टिस जोसेफ का नाम सबसे नीचे है. इसका मतलब है कि वे फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के सबसे जूनियर न्यायाधीश होंगे. साथ ही इसका असर उनके सीजेआई बनने और किसी भी बेंच की अध्यक्षता करने की संभावनाओं पर भी पड़ेगा.

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के कुछ जजों ने इस मसले पर आपत्ति जताते हुए सीजेआई दीपक मिश्रा से मुलाकात की थी. जस्टिस मिश्रा ने उन्हें केंद्र से बात करने का भरोसा दिया था. खबरों के मुताबिक उन्होंने इस मुद्दे पर अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल से बात भी की थी. उधर, सरकार का दावा है कि उसने जजों की नियुक्ति वरिष्ठता के सिद्धांत के आधार पर की है.

जस्टिस जोसेफ की नियुक्ति विवाद पर अगर नज़र डाली जाए तो सुप्रीम कोर्ट के कोलीजियम ने बीती 10 जनवरी को सरकार से उनके नाम की सिफारिश की थी. सरकार ने पहले तो कई महीने उसे लंबित रखा और बाद में उसे पुनर्विचार के लिए वापस कर दिया. सरकार का कहना था कि जस्टिस जोसेफ हाईकोर्ट के न्यायाधीशों की आल इंडिया वरिष्ठता सूची में काफी नीचे हैं. उसकी यह भी दलील थी कि वे मूलत: केरल हाईकोर्ट से आते हैं और केरल का पहले ही सुप्रीम कोर्ट में पर्याप्त प्रतिनिधित्व है, जबकि कई ऐसे प्रांत हैं जिनका कोई प्रतिनिधित्व नहीं है.

इस मामले में मोदी सरकार पर न्यायपालिका में दखल का आरोप लग रहा है. एनडीटीवी के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के एक जज का कहना है कि जस्टिस जोसेफ का नाम सरकार को पहले भेजा गया था, लेकिन सरकार ने नियुक्ति के लिए जारी अधिसूचना में इसे तीसरे नंबर पर रखा है. यानी वे बाकी दोनों जजों से जूनियर हो गए हैं. उधर, एक अधिकारी के अनुसार वरिष्ठता सूची में जस्टिस बनर्जी चौथे और जस्टिस सरन पांचवें स्थान पर हैं जबकि जस्टिस जोसेफ का स्थान 39वां है.