सोशल मीडिया पर इन दिनों एक मृत किसान और उसके दो मृत बैलों की तस्वीर ख़ूब शेयर की जा रही है. साथ में एक और तस्वीर है जिसमें एक फटी चप्पल को दिखाया गया है. दोनों तस्वीरों को जोड़ कर कहा जा रहा है, ‘किसान के बैल भूख से गिर कर मर गए. किसान भी मर गया. लेकिन वह अपनी चप्पल पर डिजिटल इंडिया के लिए सवाल छोड़ गया. लेकिन हम विराट (कोहली) और कुछ अभिनेताओं के पीछे भाग रहे हैं. जैसे वे ही हमारे देश के लिए लड़ रहे हैं.’

यह पोस्ट फ़ेसबुक, वॉट्सएप और ट्विटर पर कई अलग-अलग अकाउंटों से शेयर की जा रही है. हज़ारों की संख्या में इसे शेयर किया गया है. इसके ज़रिए यह साबित करने की कोशिश की गई है कि मोदी सरकार देश को डिजिटल बनाने का दावा कर रही है और देश के किसानों के पास चप्पल ख़रीदने के भी पैसे नहीं हैं, उन्हें फटी चप्पलों को तारों से सीकर पहनना पड़ रहा है.

वैसे देश में कई किसानों के हालात कुछ ऐसे ही हैं. लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल इन दोनों तस्वीरों का एक-दूसरे से कोई संबंध नहीं है, न ही इन्हें लेकर गढ़ी गई कहानियां सच हैं. द प्रिंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ दोनों बैलों और किसान की मौत बिजली गिरने से हुई थी. यह घटना बीती 22 जून को मध्य प्रदेश के देवास में हुई थी. ख़बर के मुताबिक़ मृतक किसान का नाम कालू था. वह ज़िले के लक्ष्मीनगर गांव का निवासी था.

रिपोर्ट में चप्पल का सच भी बताया गया था. उसके मुताबिक़ यह तस्वीर 2013 से सोशल मीडिया पर वायरल है. हमने चप्पल की स्ट्रैप (पट्टी) पर ग़ौर किया तो एक अलग ही तथ्य सामने आया. तस्वीर को उलटा करने पर जो स्पेलिंग मिली वह ‘HAWALAIAS’ नज़र आई. इस नाम से हमने गूगल सर्च किया तो सही स्पेलिंग मिली जो कि ‘HAWAIANAS’ थी. यह एक ब्राज़ीलियन ब्रांड है जिसकी शुरुआत स्कॉट्समैन रॉबर्ट फ़्रैज़र नाम के व्यक्ति ने 1962 में की थी. फ़िलहाल इसका मालिकाना हक़ ब्राज़ील की अलपरगटास (Alpargatas) नामक कंपनी के पास है.

साफ़ है कि सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट मोदी सरकार के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के ख़िलाफ़ कुप्रचार करने के लिए चलाई गई फ़ेक न्यूज़ है.