पहले हजारों करोड़ रुपए का कर्ज़ लेना. फिर उसे जानबूझकर नहीं चुकाना. और अंत में देश छोड़कर भाग निकलना. पिछले कुछ समय से भारतीय कारोबारियों के बीच यह चलन लगातार देखने में आ रहा है. शराब कारोबारी विजय माल्या, हीरे-जवाहरात के व्यापारी नीरव मोदी और उसके रिश्तेदार मेहुल चौकसी इसका सबसे चर्चित उदाहरण हैं. लेकिन अब सूत्रों की मानें तो केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ऐसे इंतज़ाम कर रही है जिनके बाद जानबूझकर कर्ज़ चुकाए बिना देश छोड़कर भागने का मंसूबा रखने वाले कारोबारी अपने इरादे में सफल नहीं हो पाएंगे.

द इकॉनॉमिक टाइम्स के अनुसार ऐसे मामलों में क्या-कुछ हो सकता है इस बारे में विचार करने और सुझाव देने के लिए मोदी सरकार ने एक समिति बनाई थी. वित्तीय सेवाओं के केंद्रीय सचिव राजीव कुमार इसके अध्यक्ष बनाए गए थे. समिति ने सरकार को अपनी सिफारिशें सौंप दी हैं. इनमें सबसे अहम ये है कि 50 करोड़ रुपए से ज़्यादा का कर्ज़ लेने वालों को देश से बाहर जाने की सरकार से पूर्व इजाज़त लेनी होगी. और अगर कर्ज़ चुकाने का उनका रिकॉर्ड अच्छा नहीं है तो उन्हें इजाज़त दी ही न जाए.

सूत्रों के मुताबिक समिति ने इसके लिए भारतीय पासपोर्ट कानून की धारा-10 में संशोधन की सिफारिश की है. यह धारा किसी के पासपोर्ट को ब्लॉक या निरस्त करने से संबंधित है. समिति की सिफारिश के मुताबिक इस धारा में संशोधन कर यह प्रावधान जोड़ा जा सकता है कि अगर किसी नागरिक ने निश्चित सीमा से अधिक का कर्ज़ जानबूझकर नहीं चुकाया है तो उसे देश के वित्तीय और आर्थिक आर्थिक ढांचे के लिए ख़तरा माना जाएगा. ताकि उसके ख़िलाफ पासपोर्ट ज़ब्ती आदि की कार्रवाई की जा सके.

इस कार्रवाई के लिए जानबूझकर न चुकाए जाने वाले कर्ज़ की अधिकतम सीमा फिलहाल समिति ने 50 करोड़ रुपए मानी है. हालांकि इस पर अभी अंतिम फैसला होना. लेकिन सूत्रों की मानें तो सरकार इस सीमा और समिति की सिफारिशों को मंज़ूरी दे सकती है. ऐसा इसलिए माना जा रहा है कि इसी साल मार्च में सरकार ने सभी बैंकों को निर्देश दिया था कि वे 50 करोड़ रुपए से ज़्यादा के कर्ज़दारों के पासपाेर्ट की जानकारी जुटाएं. लिहाज़ा सूत्रों की मानें तो इस बाबत अगला फैसला जल्द ही हो सकता है.