केरल में कैथलिक चर्चों के ओहदेदारों (सेक्सटन) का मजदूर संघ बन सकता है. खबर है कि राज्य के सभी चर्चों के ओहदेदार इसका समर्थन कर रहे हैं. उन्होंने मजदूर संघ बनाने के लिए हाथ मिला लिए हैं. चर्चों के लिए कहा जाता है कि उनका सिस्टम मजदूर संघवाद जैसी चीजों से दूर रहा है. लेकिन अगर केरल के चर्चों के ओहदेदारों की मुहिम अपने अंजाम तक पहुंची तो शायद यह पहला मौका होगा जब दुनिया में चर्चों में काम करने वाले लोगों का कोई मजदूर संघ होगा.

चर्चों के ओहदेदारों या अधिकारियों के लिए सेक्सटन शब्द का इस्तेमाल किया जाता है. ये लोग चर्च और कब्रिस्तान की देखरेख का काम करते हैं. द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक इन लोगों की कई समस्याएं हैं जिनके समाधान के लिए वे जल्द ही मजदूर संघ की स्थापना के लिए समिति बनाने जा रहे हैं. इस बाबत केरल चर्च स्टाफ एसोसिएशन और कुछ चुने हुए पदाधिकारियों के बीच गुप्त बैठक भी हुई है. एंटनी पुथेनवीटटिल को समूह का अध्यक्ष चुना गया है. वहीं, वर्गेश ओलीपरांबली को सचिव और मार्टिन पोरुस को कोषाध्यक्ष बनाया गया है.

इस मुद्दे पर सामाजिक कार्यकर्ता पौलाचन पुथुपरा कहते हैं, ‘हमारा उद्देश्य अधिकारों की लड़ाई लड़ना है. अब तक चर्च के ओहदेदारों की तरफ से बोलने वाला कोई नहीं था. उनका काफी शोषण हुआ है. वे बाहर बोलने से डरते हैं.’

समिति की स्थापना को लेकर ओहदेदारों को उम्मीद है कि इससे उनकी कई मांगें पूरी होंगी. इनमें उचित वेतनमान, प्रोविडेंट फंड और अन्य प्रकार के मेहनताने शामिल हैं. वहीं, पौलाचन का कहना है, ‘इसका मुख्य उद्देश्य ओहदेदारों का शोषण रोकना है. एक बार सभी को इस (समिति) बारे में पता चल जाए, फिर तुरंत इसकी सदस्य संख्या में इजाफा होगा. क्या आप जानते हैं कि राज्य में 1,000 से ज्यादा चर्च हैं?’

ओहदेदारों की मुख्य समस्या पादरियों की मनमानी से जुड़ी हुई है. खबरों के मुताबिक अगर उन्हें लगता है कि कोई ओहदेदार उनके कहने पर नहीं चल रहा तो वे उसे तुरंत निकाल देते हैं. वे चर्च में आने वाले लोगों को उस ओहदेदार के खिलाफ कर देते हैं. एक ओहदेदार ने बताया कि कैसे पादरी चोरी जैसे आरोप लगा कर उन्हें निकलवा देते हैं. वहीं, ओहदेदारों में यह भावना आम हो चुकी है कि उन्हें चर्चों की धोखाधड़ी पर चुप रहना है. पौलाचन ने बताया, ‘उन्हें पादरियों के अत्याचार सहने पड़ते हैं.’

एक और ओहदेदार ने बताया कि पादरी विशेष प्रार्थनाओं के लिए इकट्ठा किए गए पैसे में हेराफेरी करते हैं. उसने बताया, ‘अगर एक पादरी को 10 प्रार्थनाओं के लिए पैसा मिला है तो वह इसे जानबूझकर एक प्रार्थना का पैसा बना देता है. (इस तरह) वह ओहदेदार को एक प्रार्थना का पैसा देता है. बाकी पैसा उसकी जेब में चला जाता है.’ कहा जा रहा है कि मजदूर संघ बनने के बाद इस तरह के मुद्दों को उठाया जाएगा.