क्या हार्दिक पांड्या के रूप में भारतीय क्रिकेट को अालराउंडर के तौर पर कपिल देव का उत्तराधिकारी मिल गया है? पिछले साल इस सवाल को लेकर उठी चर्चा इन दिनों फिर गर्म है. हार्दिक ने इंग्लैंड के खिलाफ पहले टेस्ट की दोनों पारियों में घातक गेंदबाजी के सामने ठीक-ठाक वक्त गुजारा. दूसरी पारी में उनके 22 रनों ने तो एकबारगी भारत के खेमे मेें उम्मीद जगा दी थी कि हार्दिक अपने दम पर जीत का रुख भारत की तरफ मोड़ सकते हैं. इसी तरह दूसरे टेस्ट में वे तीन विकेट लेकर सबसे सफल भारतीय गेंदबाज बने. भले ही भारत इंग्लैंड दौरे के दोनों शुरुआती मैच हार गया हो, लेकिन इससे हार्दिक पांड्या के प्रदर्शन की अहमियत कम नहीं हो जाती.

हार्दिक पिछले दो साल से भारतीय टीम का हिस्सा हैं और उनकी अालराउंड प्रतिभा ने कई बार भारतीय टीम को मुसीबत से निकाला है. लेकिन क्या इतने भर से उनकी तुुलना महान आलराउंडर कपिल देव से करना उचित है? क्या ऐसी तुलना हार्दिक पांड्या पर भी बेजा दबाव नहीं बढ़ाती? अभी हाल ही में एक टीवी चैनल से बात करते हुए सुनील गावस्कर ने भी कपिल और हार्दिक की तुलना पर नाखुशी जताई. गावस्कर ने कहा, ‘कपिल जैसा खिलाड़ी सदियों में एक बार होता है. उनकी तुलना किसी से नहीं की जा सकती.’

दरअसल, कपिल और हार्दिक की तुलना ने उस समय जोर पकड़ा था जब 2017 के कैलेंडर ईयर में हार्दिक ने एक दिवसीय मैचों में 555 रनों के साथ 31 विकेट चटकाए. यह आंकड़ा कपिल के उस रिकार्ड को छू रहा था जिसमें उन्होंने 1986 में 517 रन बनाए थे और 32 विकेट लिए थे.

लेकिन क्या महज अांकड़ों का यह सैंपल हार्दिक को कपिल के बराबर लाकर खड़ा कर देता है? इन आंकड़ों की तुलना करने के साथ उस समय के एकदिवसीय क्रिकेट के मिजाज और वक्त के साथ इसके नियमों में आए बदलावों पर भी एक नजर डाली जानी चाहिए. कपिल जिस समय भारतीय टीम को बल्ले और गेंद दोनों से सहारा दे रहे थे, तब न आज की तरह की फील्डिंग की पाबंदियां थी और न ही क्रिकेट उस तरह से बल्लेबाजों का खेल हुआ करता था, जैसा आज हो गया है.

हालांकि एक ऐसे वक्त में जहां क्रिकेट की दर्शनीयता और पठनीयता करोड़ों लोगोंं तक पहुंच चुकी है, ऐसी तुुलनाओं से नहीं बचा जा सकता. ब्लॉग्स से लेकर सोशल मीडिया तक खिलाड़ियों की तुलना से भरे हैं. इसी दौरान कह दिया जाता है कि हार्दिक पांड्या के रूप में भारत को कपिल देव जैसा अालराउंडर मिल गया है और इसके पक्ष में कुछ मैचों के अांकड़े पेश कर दिए जाते हैं. लेकिन इस तरह की तुलना करने वालों को उन लेखों पर भी नजर डालनी चाहिए जिनमें कपिल की तुलना इमरान खान और इयान बॉथम से की जाती रही है.

सर्वकालिक महानतम आलराउंडर की इस बहस पर हजारों पन्ने लिखे गए हैं. दुनिया के महानतम अॉलराउंडर सर रिचर्ड हेडली को भी इन अंतहीन बहसों में शामिल किया जाता है रहा है. लेकिन खुद हेडली बॉथम, कपिल और इमरान की तिकड़ी को ही सर्वश्रेष्ठ मानते हैं. उधर, बहुत से क्रिकेट विशेषज्ञ मानते हैं कि बॉथम और कपिल बल्लेबाजी के मोर्चे पर इमरान से बेहतर थे. हालांकि खुद कपिल का मानना है कि तीनों में इयान बॉथम निर्विवादित रूप से सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज थे, हां, गेंदबाजी में तुुलना की जा सकती है.

खेल पत्रकार संतोष शुक्ल कहते हैं, ‘इस तरह की चर्चाओं का कोई निष्कर्ष नहीं निकलता लेकिन, हार्दिक के साथ कपिल की तुलना करने वालों को देखना चाहिए कि कपिल की तुलना क्रिकेट की दुनिया के किन लोगोंं से होती रही है और उनके सामने अभी हार्दिक की उपलब्धियां क्या हैं?’ संतोष आगे कहते हैं, ‘कपिल जब वेस्टइंडीज की घातक गेंदबाजी के साामने खेलते थे तो बिल्कुल विशेषज्ञ बल्लेबाज नजर आते थेे. कपिल ऐसे भारतीय तेज गेंदबाज थे जो दिनभर में 20-25 ओवर की गेंदबाजी करने की क्षमता रखता था. जबकि हार्दिक को नई गेंद के साथ अभी बहुत सुधार करना है. लंबे स्पेल में वे लेंथ से भटकने लगते हैं.’

अगर अांकड़ों पर ही जाएं तो कपिल ने जब टेस्ट मैच में पदार्पण यानी डेब्यू किया था तो उनके अांकड़े उतने प्रभावशाली नहीं थे. लेकिन यह बात अपनी जगह थी कि स्पिन के इर्द-गिर्द नाचती भारतीय गेंदबाजी में एक ऐसा शख्स आया था जो पाकिस्तानी बल्लेबाजों के कानों के पास से सनसनाती गेंदे निकाल रहा था. कपिल के बाउंसर बल्लेबाजों के हेलमेट से टकरा रहे थे. भारत तेंज गेंदबाज नहीं पैदा कर सकता, कपिल ने यह धारणा एक झटके में तोड़ दी थी.

उधर, हार्दिक पांड्या आईपीएल युग के क्रिकेटर हैं जहां लंबे शॉट लगाना अनिवार्य है और क्षेत्ररक्षण की पाबंदियां इस काम को और आसान बना देती हैं. लेकिन कपिल देव ने 1978 में अपने तीसरे ही टेस्ट में 33 गेंदों में 50 रन मारकर बता दिया था कि उनके पास तेज गति की आउटस्विंगर के अलावा बहुत सारे स्ट्रोक भी हैं.

कपिल की नैसर्गिक प्रतिभा भारतीय क्रिकट मेें एक झोंके की तरह आई और उसने भारतीय क्रिकेट का वह दूसरा सिरा थाम लिया जिसे एक तरफ से सुनील गावस्कर थामे हुए थे. 1983 में कपिल के नेतृत्व में भारत ने विश्व कप जीतकर जो किया, उसने भारतीय क्रिकेेट की दुनिया में अामूलचूल बदलाव कर डाला. उस विश्व कप में जिम्बाब्वे के खिलाफ खेली गई कपिल की 175 रनों की पारी की रिकार्डिंग उपलब्ध नहीं है (क्योंकि उस समय बीबीसी में हड़ताल चल रही थी) वरना हार्दिक कपिल की उस मानसिक दृढ़ता का अंदाजा लगा सकते थे जो पक्के तौर पर उनकी अपनी आक्रामकता से अलग है.

इसी तरह 1990 में लार्ड्स में खेली गई कपिल की पारी याद की जा सकती है. इंग्लैंड के पहले पारी में बनाए गए 653 रन के जवाब में अजहर और रवि शास्त्री के शतक के बावजूूद भारत के 430 रन पर नौ विकट गिर गए थे. भारत को फालोअान बचाने के लिए 24 रन चाहिए थे और कपिल का साथ देने के लिए केवल नरेंद्र हिरवानी बचे थे. स्पिनर हिरवानी कब अाउट हो जाते क्या भरोसा! ऐसे में कपिल ने खुद स्ट्राइक ली और फिर स्पिनर हेेमिंग्स केे ओवर में लगातार चार छक्के जड़़ दिए. पूरा लार्ड्स स्तब्ध था. जहां भारत का फालोआन खेलना तय लग रहा था, वहां कपिल की धुआंधार बल्लेबाजी ने भारत की पारी से हार टाल दी थी. इंग्लैंड को अपनी दूसरी पारी के लिए आना पड़ा. पिछले साल श्रीलंका के खिलाफ एक टेस्ट में शतक लगाने के दौरान हार्दिक पांड्या ने एक ओवर में 26 रन बना कपिल का यह रिकार्ड तोड़ दिया, लेकिन दोनों मैचों के हालात में बहुत फर्क था. जानकारों के मुताबिक कैंडी के छोटे से मैदान में एक अोवर में 26 रन बटोरने की तुलना लार्ड्स के उन छक्कों से नहीं की जा सकती जो बहुत मुश्किल और दबाव वाले हालात में आए थे.

कोरा डॉट.कॉम पर एक यूजर कपिल और हार्दिक की तुलना पर लिखते हैं, ‘कपिल देव दुनिया के एक जाने-माने आलराउंडर हैं और अपने नटराज शॉट के लिए जाने जाते हैं. वहीं, हार्दिक एक चर्चित बच्चा है जो नटराज पेंसिल इस्तेमाल करता है.’ इस तरह की बहसों का सोशल मीडिया पर आकर इसी तरह का अंत होता है. दक्षिण अफ्रीका दौरे के समय हार्दिक पांड्या उस तुलना के लिए ट्रोल हुए जिसमें उनकी कोई गलती नहीं थी.

कपिल देव भारतीय क्रिकेेट के वह खिलाड़ी हैैं जिन्होंने देश में खेल को खड़ा किया है. लंबे करियर में कपिल की फिटनेस एेसी थी कि उन्होंने 131 में केवल एक टेस्ट मिस किया और दो टेस्ट में उन्हें अन्य कारणों से बाहर बैठना पड़ा. 434 टेस्ट विकेट और पांच हजार से ज्यादा रन के साथ कपिल की अद्भुत कप्तानी का रिकार्ड भी कहता है कि हार्दिक पांड्या को अभी बहुत कुछ हासिल करना है.

हार्दिक स्ट्रोक खेलते हैं, हिट करते हैं और एक दिवसीय मैचों के लिहाज से उनकी गेंदबाजी भी उपयोगी है. लेकिन कपिल बनने के लिए इससे इतर भी कुछ चाहिए. उनके साथ अपनी तुलना पर कपिल मुस्कराहट केे साथ जवाब देते हैं, ‘पांड्या मुझसे बेहतर है लेकिन, उसे अभी और मेहनत की जरूरत है.’ उनकी मुस्कराहट संकेत है कि हार्दिक पांड्या को अभी कितना कुछ और करना है. हार्दिक भी इस तुलना पर बहुत विनम्र हैं. वे कहते हैं, ‘अगर मैं कपिल के प्रदर्शन का दस फीसद भी कर सका तो अपने को धन्य समझूंगा.’ अच्छी बात है कि हार्दिक पांड्या इस तुुलना की निरर्थकता को समझते हैं. उन्हें इस बहस के सिर्फ सकारात्मक पहलुओं पर ध्यान देना चाहिए न कि सोशल मीडिया पर पर चल रहे मजाक पर.

जानकार मानते हैं कि कपिल देव बनने के लिए अभी हार्दिक पांड्या को वह अनुशासन लाना है, जिसमें लंबे-लंबे स्पेल में भी गेंदबाज अपनी लाइन-लेंथ नहीं मिस करता है. इसके अलावा सिर्फ गेंदबाजी में ही नहीं बल्लेबाजी में भी उन्हें विदेशी पिचों की अॉफ स्टंप के बाहर की उस सनसनाहट से निपटने में अनुशासन रखना होगा, जिसमें धुरंधर भारतीय बल्लेबाज भी चमका खा जाते हैं. एजबेस्टन टेस्ट में हार्दिक पांड्या ने विराट के साथ पहली पारी में 48 रन की साझेदारी की. लेकिन बेन स्टोक्स की गेंद पर उन्होंने बल्ला अड़ाया था और गेंद हवा में उछल एलिस्टर कुक की ओर गई. अगर कुक वह कैच नहीं छोड़ते तो कहानी दूसरी होती. हालांकि एजबेस्टन टेस्ट की दूसरी पारी में बल्लेबाजी में हार्दिक अधिक परिपक्व दिखे, लेकिन परिपक्वता का यह स्तर कपिल तक ले जाने केे लिए उन्हें अपने उत्साह को अनुभव और उससे ज्यादा कहीं मानसिक मजबूती में बदलना होगा.