अमेरिका की एक अदालत ने अपने ही देश के एक पूर्व नौसैनिक एडम प्यूरिनटन को तीन बार की उम्र कैद की सजा सुनाई है. पूर्व नौसैनिक को यह सजा बीते साल फरवरी में नस्लीय आधार पर भारतीय मूल के एक इंजीनियर श्रीनिवास कुचिभोटला की हत्या और इसी घटना के दौरान दो अन्य लोगों को जख्मी कर देने के मामले में सुनाई गई है. द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक सजा सुनाए जाने से पहले मामले की सुनवाई के दौरान आरोपित ने अपना गुनाह भी स्वीकार कर लिया था.

बुधवार को मामले के आरोपित को सजा सुनाए जाने के बाद अटॉर्नी जनरल जेफ सेशंज ने एक बयान में कहा, ‘इस मामले के दोषी ने जाति, रंग और राष्ट्रीयता के आधार पर हत्या के इरादे से श्रीनिवास कुचिभोटला को निशाना बनाया था. इस अपराध को अंजाम देते हुए इसने कई अन्य जिंदगियों को संकट में डाला. यह एक अत्यंत निंदनीय और घृणित अपराध है. ऐसे में अपराधी को बिना पैरोल की अनुमति के सजा सुनाई गई है.’

इस दौरान श्रीनिवास कुचिभोटला की विधवा सुनयना दुमाला ने कहा, ‘मेरे पति हमेशा से ही लोगों के प्रति दयालु और उनकी परवाह करने वाले रहे थे. उन्होंने हमेशा हर किसी को सम्मान दिया. मैं और मेरे पति अनेक सपनों के साथ अमेरिका आए थे लेकिन एक घटना ने इन सभी सपनों को चकनाचूर कर दिया. लोगों को रंग-भेद और नस्लीय हिंसा छोड़नी चाहिए. किसी व्यक्ति के रंग से उसके चरित्र और विचारों का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता.’

क्या थी यह घटना?

अमेरिका के कंसास शहर में बीते साल फरवरी के महीने में एडम प्यूरिटन ने भारतीय इंजीनियर श्रीनिवास कुचfभोटला पर गोली चलाई थी जिससे उनकी मौत हो गई थी. प्यूरिटन ने उन्हें राष्ट्रीयता और नस्लीय भेदभाव आधार पर निशाना बनाया था. गोलीबारी की इस घटना में आलोक मदासानी नामक एक अन्य भारतीय भी घायल हुआ था. श्रीनिवास और मदासानी को बचाने के लिए एक अमेरिकी नागरिक इयान ग्रिलट ने कोशिश की थी और इस कोशिश में वह खुद भी जख्मी हो गया था. इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसकी कड़ी निंदा की थी.