गुजरात हाईकोर्ट ने पाटीदार नेता हार्दिक पटेल की सजा पर पर रोक लगा दी है. रोक का यह आदेश अगली सुनवाई तक प्रभावी होगा. पटेल को सजा सुनाए जाने का यह मामला 2015 के पाटीदार आंदोलन के दौरान हुई हिंसा से जुड़ा है.

ख़बरों के मुताबिक हाईकोर्ट के जज एसएच वोरा ने हार्दिक की सजा पर रोक का आदेश जारी किया है. इस बारे में ख़ुद हार्दिक ने ही मीडिया काे जानकारी दी. उन्होंने बताया, ‘मैंने निचली अदालत के आदेश के ख़िलाफ़ अपील की थी. उस पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है. अब इस प्रक्रिया में उच्च न्यायालय हमसे जो भी अपेक्षा करेगा उसे हम पूरा करेंगे. मैं अपनी इस बात पर अब भी पूरी क़ायम हूं कि आंदोलन के दौरान मैं हिंसा की किसी गतिविधि में भागीदार नहीं रहा हूं, जिसके लिए मुझे सजा दी जाए.’

ग़ौरतलब है कि हार्दिक को दो साल क़ैद की यह सजा विसनगर की अदालत ने सुनाई थी. आरक्षण आंदोलन के दौरान हिंसा की पहली घटना 23 जुलाई 2015 को हुई थी. उस वक़्त भारतीय जनता पार्टी के विधायक ऋषिकेश पटेल के दफ्तर में जमकर तोड़फोड़ और आगजनी की गई थी. मामले में कुल 17 आरोपित थे. इनमें से अदालत ने तीन- हार्दिक पटेल, लालजी भाई पटेल और एके पटेल को दोषी ठहराया था. जबकि 14 अन्य को बरी कर दिया था. तीनाें दोषियों को दो-दो साल कैद की सजा सुनाई गई थी.

अदालत ने हार्दिक समेत तीनों दोषियों को 50 -50 हजार रुपए का जुर्माना और 10-10 हजार रुपए मुआवजे के तौर पर चुकाने का आदेश भी दिया था. हालांकि इसके तुरंत बाद तीनों को 15-15,000 रुपए के मुचलके पर सशर्त जमानत भी मिल गई थी. साथ ही उन्हें 27 अगस्त तक फैसले के ख़िलाफ़ ऊपरी अदालत में अपील करने का मौका भी दिया गया था.