भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक नेशनल रजिस्टर आॅफ सिटिजंस (एनआरसी) की वजह से भारत-बांग्लादेश के आपसी संबंधों पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा. इस बारे में गुरुवार को एक प्रेस कान्फ्रेंस के दौरान एक सवाल का जवाब देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा, ‘हमने बांग्लादेश को आश्वस्त किया है कि एनआरसी की सूची सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर तैयार कराई गई है और इसे अंतिम रूप दिया जाना बाकी है. राज्य में नागरिकों की पहचान की प्रक्रिया अब भी जारी है.’ उन्होंने आगे कहा, ‘बांग्लादेश इस मुद्दे को भारत के आंतरिक मामले के तौर पर देख रहा है.’

इससे पहले बीते महीने एनआरसी की दूसरी सूची जारी किए जाने के बाद असम के 40 लाख लोगों की भारतीय नागरिकता पर सवाल खड़े हो गए हैं. साथ ही इस मुद्दे को लेकर सियासी घमासान भी मचा हुआ है. विपक्षी दलों ने सत्ताधारी दल पर निशाना साधते हुए कहा है कि सरकार एनआरसी के जरिये राज्य के लोगों को अवैध नागरिक घोषित करना चाहती है. बीच में इस मुद्दे की वजह से संसद की कार्यवाही भी स्थगित करनी पड़ी थी.

बढ़ते विवाद को देखते हुए तब इस मामले पर केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि एनआरसी की जारी की गई दूसरी सूची अंतिम सूची नहीं है और जिन लोगों के नाम इसमें छूटे हुए हैं उन्हें अपनी नागरिकता साबित करने का मौका दिया जाएगा. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने भी एनआरसी की अंतिम सूची जारी होने तक असम के किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कोई कार्रवाई न करने के निर्देश दिए थे.