अनुराग कश्यप की ‘मनमर्जियां’ के ट्रेलर में फिल्म की कहानी से आपका परिचय यह कहते हुए करवाया जाता है कि प्यार कॉम्पलिकेटेड नहीं होता, लोग होते हैं. इससे आप सहमत हो ही रहे होते हैं कि फिल्म से जुड़ी दूसरी बात - प्यार को फ्यार कहा जाना - आपका ध्यान खींचती है. ‘एफ’ वर्ड को प्यार से जोड़कर, ‘फ्यार’ बनाना यानी प्यार और सेक्स को एक बताने जैसा है. यह शाब्दिक आविष्कार जरा देर के लिए आपके दिमाग में खटकता है और आप सोचने लग सकते हैं कि इसके लिए अनुराग कश्यप पर खुश हुआ जाए या नाराज़! लेकिन ट्रेलर खत्म होने के बाद भी अगर आप सोचेंगे, ईमानदारी से, तो हो सकता है इस नतीजे पर पहुंच जाएं कि ‘फ्यार’ आज के प्यार को परिभाषित करने के लिए गढ़ा गया एक बेहद ईमानदार शब्द है. और, इस तरह यह ट्रेलर इस बात का यकीन दिलाता है कि इस फिल्म की त्रिकोणीय प्रेमकहानी, रिलेशनशिप को एक अलग ही चश्मे से देखती और दिखाती नजर आने वाली है.

ट्रेलर से कहानी का जितना अंदाजा लगता है, उसके अनुसार रूमी और विकी एक दूसरे के साथ ‘फ्यार’ करते है. इसकी झलकियों में बैडबॉय की सारी हरकतें करने वाला विकी कमिटमेंट से डरने वाला, मगर सच्चा आशिक नजर आता है. वहीं उसकी इस खूबी-खामी से नाराज, अपने ‘फ्यार’ को छोड़कर रूमी एक निहायत शरीफ लड़के रॉबी से शादी कर लेती है. इसके बाद इन तीनों की जिंदगी में ‘फ्यार’ कितना तारी रहता है और प्यार कैसे अपनी जगह बनाता है, शायद फिल्म यही दिखाने वाली है.

रूमी बनी तापसी पन्नू को देखते हुए आपको कुछ पल के लिए ‘रनिंग शादी’ की निम्मी याद आती है. हालांकि लगभग वैसा ही लगने वाला किरदार निभाते हुए वे जब संवाद बोलती हैं तो कुछ अनदेखी-अनसुनी सी ही लगती हैं. अभिनय में उन्हें टक्कर देने के लिए यहां पर विकी कौशल भी मौजूद हैं. अजीबो-गरीब हेयर स्टाइल, गॉगल्स और कपड़ों से ‘क्रीप’ कहकर इग्नोर किए जाने वाले बंदे का फील देने वाले विकी कौशल को यहां एकदम से पहचानना मुश्किल है. और इससे भी लगता है कि वे फिल्म में बहुत अच्छा अभिनय करने वाले हैं. हालांकि रूमी और विकी को एक साथ देखते हुए, फिल्म भूलकर, आप इस बात की शिकायत भी कर सकते हैं कि खूबसूरत लड़कियां हमेशा गुंडों सरीखे लड़कों से ही क्यों पट जाती हैं!

खैर, इस त्रिकोणीय प्रेम कथा का तीसरा सिरा अभिषेक बच्चन को थमाया गया है. यहां पर उन्हें देखकर लगता है कि वे अभिनेता बुरे नहीं है, बल्कि बुरा तो अमिताभ बच्चन का बेटा होने के चलते उन पर लादा गया अपेक्षाओं का बोझ है. हालांकि लगभग ऐसी ही भूमिका वे करण जौहर की ‘कभी अलविदा ना कहना’ में भी निभा चुके हैं, लेकिन कश्यप ने उनसे उससे कहीं ज्यादा काम निकलवाया होगा, इस बात का अंदाजा भी ट्रेलर से लगता है. दो साल बाद जूनियर बच्चन का ‘मनमर्जियां’ के जरिए सिल्वर स्क्रीन पर लौटना, दर्शकों के साथ-साथ उनके लिए भी एक अच्छा अनुभव साबित हो सकता है.

इस साल की शुरूआत में ‘मुक्काबाज’ की प्रेम कहानी दिखाने वाले अनुराग कश्यप मनमर्जियां में एक बार फिर प्रेम कहानी ही लेकर आए हैं. आमतौर पर काले या धूसर रंगों में फिल्म बनाने वाले कश्यप का यह सिग्नेचर स्टाइल ‘मनमर्जियां’ की झलकियों में भी ऩजर आता है. खुले आसमान के नीचे या वादियों में फिल्माए दृश्यों की झलकों में इसे ज्यादा गहराई से महसूस किया जा सकता है. अच्छी बात यह है कि परंपरागत बॉलीवुड फिल्म लग रही ‘मनमर्जियां’ में कश्यप के फैन्स के अलावा, बाकी दर्शकों को भी खुश करने की काबिलियत दिखती है. कुल मिलाकर, तीन मिनट का यह ट्रेलर देखने के बाद 14 सितंबर को रिलीज हो रही इस फिल्म की टिकट बुक करने के बारे में सोचा जा सकता है.

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