राज्यसभा के उपसभापति के चुनाव में एनडीए के उम्मीदवार हरिवंश नारायण सिंह की जीत की खबर आज लगभग सभी अखबारों के पहले पन्ने पर है. विपक्ष की ओर से कांग्रेस के बीके हरिप्रसाद से उनका मुकाबला था. हरिवंश नारायण सिंह को 125 वोट हासिल हुए जबकि हरिप्रसाद को 101 वोट ही मिल पाए. इसके अलावा केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा तीन तलाक विधेयक में एक अहम संशोधन की खबर भी अखबारों की प्रमुख सुर्खियों में शामिल है. अभी-भी एक साथ तीन तलाक बोलकर तलाक दिए जाने को गैर जमानती अपराध माना गया है, लेकिन इन मामलों में मजिस्ट्रेट को जमानत देने का अधिकार होगा. विपक्षी दल जिन मांगों को उठाते हुए इस विधेयक का विरोध करते रहे हैं, उनमें एक मांग यह भी थी.

दिल्ली के एक सरकारी स्कूल में दूसरी कक्षा की छात्रा से बलात्कार

दिल्ली में दूसरी कक्षा की एक बच्ची से बलात्कार का मामला सामने आया है. दैनिक भास्कर की खबर के मुताबिक यह घटना एक सरकारी स्कूल के परिसर में हुई. आरोपित स्कूल का ही इलेक्ट्रीशियन बताया जा रहा है. पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है. कुछ दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने देश में बढ़ती बलात्कार की घटनाओं पर चिंता जताई थी. अदालत ने राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो का हवाला देते हुये कहा था कि भारत में हर छह घंटे में एक महिला के साथ बलात्कार होता है. शीर्ष अदालत का कहना था कि महिलाओं के साथ हर तरफ बलात्कार की घटनाएं हो रही हैं.

भूषण स्टील के पूर्व प्रमोटर को गिरफ्तार किया गया

गंभीर अपराध जांच कार्यालय (एसएफआईओ) ने भूषण स्टील के पूर्व प्रमोटर नीरज सिंघल को गिरफ्तार कर लिया है. द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक उन पर कर्ज के जरिये जुटाए गए 2,000 करोड़ रुपये भी से ज्यादा के फंड के गलत इस्तेमाल का आरोप है. यह पहली बार है, जब एसएफआईओ ने धोखाधड़ी के मामले में किसी की गिरफ्तारी की है. कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय के अधीन कार्य करने वाली इस जांच एजेंसी को पिछले साल ही गिरफ्तारी का अधिकार दिया गया था. नीरज सिंघल को फिलहाल 14 अगस्त तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है.

एससी-एसटी एक्ट संशोधन विधेयक राज्यसभा से भी पारित

एसटी-एसटी एक्ट संशोधन विधेयक को लोकसभा के बाद गुरुवार को राज्यसभा ने भी मंजूरी दे दी. अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक इसका मतलब यह है कि अब फिर से इस कानून के तहत मामला दर्ज होने पर आरोपित की फौरन गिरफ्तारी हो सकेगी. बीती 20 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में ऐसा न करने के आदेश दिए थे. शीर्ष अदालत का कहना था कि इस कानून का दुरुपयोग हो रहा है और ऐसे में आरोपित की गिरफ्तारी से पहले एक प्राथमिक जांच की जानी चाहिए. दलित संगठन इस आदेश का विरोध कर रहे थे. लोजपा जैसे मोदी सरकार के कुछ सहयोगियों ने भी मांग की थी कि अध्यादेश या विधेयक के जरिये सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को पलटा जाना चाहिए.