क्या भारत के राष्ट्रपति किसी कंपनी के प्रमोटर हो सकते हैं? भले ही फिर वह सरकारी ही क्यों न हो? हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरशन लिमिटेड (एचपीसीएल) की मानें तो हो सकते हैं. चूंकि सरकारी कंपनियों की मालिक भारत सरकार होती है. इस नाते सरकार के प्रमुख यानी राष्ट्रपति को कंपनी ने अपना प्रमोटर बताया है. कंपनी में शून्य हिस्सेदारी वाले प्रमोटर. इसके बाद सरकार को सफाई देनी पड़ रही है.

द इकॉनॉमिक टाइम्स के मुताबिक ओएनजीसी (ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन) और एचपीसीएल के बीच विवाद की वज़ह से यह स्थिति बनी है. दरअसल एचपीसीएल में पहले भारत सरकार की 51.11 प्रतिशत हिस्सेदारी थी. लेकिन कुछ समय पहले ही ओएनजीसी ने 37,000 करोड़ रुपए चुकाकर यह पूरी हिस्सेदारी ख़रीद ली. इस नाते शेयरबाज़ार में ओएनजीसी को एचपीसीएल के मालिक के तौर पर दर्ज़ कराया जाना चाहिए था. लेकिन एचपीसीएल ने अब तक ऐसा नहीं किया है.

एचपीसीएल की दलील है कि अन्य मामलों से उसका मामला अलग और ख़ास है. वह इसलिए क्योंकि एचपीसीएल अब भी सरकारी कंपनी ही है. इसके निदेशक मंडल (बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स) की नियुक्ति सरकार ने की है न कि ओएनजीसी ने. चूंकि अब भी एचपीसीएल की मालिक भले ओएनजीसी बन गई हो पर लेकिन वह कंपनी के बोर्ड की नियुक्ति नहीं कर सकती. इसलिए उसे शेयर बाज़ार में एचपीसीएल की मालिक तौर पर दर्ज़ भी नहीं कराया जा सकता. ऐसी ही कुछ और दलीलें हैं.

मसलन एचपीसीएल का तर्क ये भी है कि इस साल के शुरूआत में जब ओएनजीसी ने उसका मालिकाना हक़ हासिल किया था तो यह शर्त भी स्वीकार की थी कि उसका स्वतंत्र अस्तित्व क़ायम रहेगा. इसलिए भी एचपीसीएल को ओएनजीसी की अधीनस्थ दूसरी कंपनियों- ओएनजीसी विदेश और एमआरपीएल की तरह नहीं माना जा सकता. बताया जाता है कि एचपीसीएल के इस रुख़ के बाद ओएनजीसी ने उसे चेतावनी भी दी कि जल्द से जल्द गलती सुधार लें. लेकिन एचपीसीएल नहीं मानी.

बल्कि एचपीसीएल के मुकेश कुमार सुराना ने तो बुधवार को अपनी तरफ से सार्वजनिक तौर पर भी स्पष्ट कर दिया कि कंपनी इस मामले में जो भी कर रही है या आगे जो कुछ भी करेगी वह शेयर बाज़ार नियामक संस्था- सेबी और कंपनी कानून के दिशानिर्देशों के अनुरूप है. इसके बाद केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को मामले में दख़ल देना पड़ा. उन्होंने गुरुवार को एक सवाल के ज़वाब में स्पष्ट शब्दों में कहा है कि वर्तमान में एचपीसीएल की मालिक ओएनजीसी ही है न कि भारत सरकार.