मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर जारी राजनीतिक हलचल के बीच प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने चुनाव में पारदर्शिता के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. यहां दाखिल याचिका में उन्होंने मांग की है कि चुनाव के दौरान ईवीएम मशीनों से जुड़ी वीवीपीएटी मशीन की पर्चियों का औचक सत्यापन किया जाए. पीटीआई के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर अगले हफ्ते सुनवाई करेगा.

वीवीपीएटी मशीन से मतदान के बाद पार्टी के चुनाव चिह्न वाली एक पर्ची निकलती है, जिसे देखकर मतदाता यह जांच सकता है कि उसने जिस दल के प्रत्याशी को वोट दिया है, वह उसे मिला है या नहीं. इसके बाद यह पर्ची एक डिब्बे में जमा हो जाती है, जिसका इस्तेमाल चुनाव संबंधी विवादों को निपटाने में किया जा सकता है.

कमलनाथ ने इस याचिका में सुप्रीम कोर्ट से चुनाव आयोग को यह निर्देश देने की मांग भी की है कि चुनाव अधिकारी सभी विधानसभा क्षेत्रों के 10 फीसदी मतदान केंद्रों में जाएं और ईवीएम के वोटों का वीवीपीएटी की पर्चियों से मिलान करें. इसके पहले जून में चुनाव आयोग ने लोक सभा और विधान सभा दोनों चुनावों में पांच फीसदी मतदान केंद्रों में वीवीपीएटी पर्चियों के सत्यापन की बात कही थी. इसके साथ आयोग का यह भी कहना था कि चुनाव अधिकारी ज्यादा से ज्यादा 14 मतदान केंद्रों पर ही वीवीपीएटी पर्चियों की गिनती करेंगे.