प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बीके हरिप्रसाद के ऊपर की गई एक टिप्पणी को राज्यसभा की कार्रवाई से हटा दिया गया है. बीके हरिप्रसाद कल हुए राज्यसभा के उपसभापति के चुनाव में कांग्रेस और कुछ विपक्षी पार्टियों के उम्मीदवार थे. इस चुनाव में एनडीए उम्मीदवार हरिवंश नारायण सिंह के चुनाव जीतने के बाद नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में कांग्रेस उम्मीदवार पर तंज कसते हुए कहा था, ‘उधर बिके हरि थे लेकिन बिका कोई नहीं...’ इस टिप्पणी के चलते सोशल मीडिया में प्रधानमंत्री की कल से ही आलोचना हो रही है. फेसबुक पर अमीश राय की पोस्ट है, ‘…इस देश को ग़ज़ब प्रधानमंत्री मिले हैं. विपक्ष के उम्मीदवार बीके हरिप्रसाद की हार के बाद अपने संबोधन में मोदी ने उन्हें बिके कहा. क्या ये हास्य बोध है? ये अश्लीलता है. शायद सदन ने भी इसे समझा और मोदी जी के सस्ते चुटकुलों पर हंसने वाले भी इस बात पर नहीं हंस पाए…’

मोदी समर्थक बीते चार सालों में भाजपा सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कई बार इस तर्ज की बात दोहराते रहे हैं कि मोदी फलाना या ढिमका काम करने वाले देश के पहले प्रधानमंत्री हैं. यहां तक कि कुछ मौकों पर खुद प्रधानमंत्री ने भी घुमाफिराकर यह बात कही है और यही वजह है कि उनके आलोचक अब कई मसलों पर उनपर तंज कसते हुए इस तर्ज का इस्तेमाल करते हैं. राज्यसभा की कार्यवाही से मोदी की टिप्पणी बाहर निकाले जाने के ताजा मसले पर भी ऐसा हुआ है. ट्विटर हैंडल @Ladbak_ पर टिप्पणी है, ‘70 सालों में पहली बार किसी प्रधानमंत्री के भाषण के एक अंश को असंसदीय मानते हुए संसद की कार्यवाही से हटाया गया है. और ऐसा गौरव पाने वाले मोदी जी देश के पहले प्रधानमंत्री बन गए हैं.’

सोशल मीडिया में इस मसले पर आई कुछ और टिप्पणियां :

राजेश प्रियदर्शी | @priyadarshibbc

वेंकैया नायडू ने ले लिया जबरन उप-राष्ट्रपति बनाने का बदला – ‘बिके हरिप्रसाद’ वाली पीएम मोदी की टिप्पणी असंसदीय और आपत्तिजनक मानकर रिकॉर्ड से हटाई गई. साहेब मत्था टेककर रोते हुए घुसे थे, याद है न? ऐसे बचन बोलेंगे लोकतंत्र के मंदिर में?

सतीश आचार्य | @satishacharya

राज्यसभा के उपसभापति के चुनाव में विपक्षी एकता :

संजय यादव | facebook

….प्रधानमंत्री का भाषण लिखने वाले सोशल मीडिया से कोई भी थर्ड ग्रेड लाइन उठाकर प्रधानमंत्री को दे देते हैं और वो उसे सीधा बोल देते हैं. वो भूल जाते हैं कि वो सदन में खड़े हैं क्योंकि उन्हें तो हर मंच चुनावी लगता है.

अमिताभ श्रीवास्तव | facebook

…प्रधानमंत्री जैसे महानुभावों के लिए ही शायद कहा गया है - बदनाम होंगे तो क्या नाम न होगा.

सुयश सुप्रभ | facebook

संसद भी ट्रोल को सभ्य नहीं बना पाती. शिक्षा इसलिए ज़रूरी है.

राकेश कुमार | facebook

पीएम मोदी की असंसदीय टिप्पणी को संसदीय रिकॉर्डिंग से हटाया गया! ज़्यादा फ़ेंकने में ग़लतियां हो ही जाती हैं, अब इसमें मोदी जी का क्या दोष?